अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे अभिभावकों और छात्रों के लिए अच्छी खबर है. बिहार के सीबीएसई बोर्ड के सरकारी स्कूलों का परीक्षाफल शानदार रहा है जबकि प्राइवेट स्कूलों के परिणाम इस बार भी बहुत खराब रहे हैं.
सीबीएसई बोर्ड के पटना जोन का परीक्षाफल पुरे देश में सबसे खराब रहा है, 62 प्रतिशत से भी कम. इसमें सबसे बड़ा योगदान बिहार के प्राइवेट स्कूलों का है जिनके लगभग 27 फीसद परीक्षार्थी ही उत्तीर्ण हो पाये हैं, पिछले वर्ष भी बिहार के प्राइवेट स्कूलों के 30 फीसद बच्चे ही उत्तीर्ण हुए थे. सबसे निचले पायदान पर रहते हुए भी अगर पटना जोन का परीक्षाफल लगभग 62 प्रतिशत तक पहुंच पाया है तो इसमें सरकारी स्कूलों और झारखंड के प्राइवेट स्कूलों का योगदान रहा है.
पटना जोन के सरकारी स्कूलों ने अपना रिजल्ट शानदार दिया है. जोन के केंद्रीय विद्यालयों का रिजल्ट 98 प्रतिशत से ज्यादा तो जवाहर नवोदय विद्यालय का रिजल्ट 94 प्रतिशत से अधिक रहा है. जबकि बड़े- बड़े प्राइवेट के लगभग 27 प्रतिशत बच्चे ही परीक्षा में उत्तीर्ण हो पाये, पिछले वर्ष भी इन स्कूलों के 30 फीसद बच्चे ही उत्तीर्ण हुए थे. ये रिजल्ट नाम बड़े दर्शन छोटे वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए प्राइवेट स्कूलों की पोल लगातार खोल रहे हैं. परन्तु अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए अभिभावकों की सोच और स्टेट्स सिम्बल के नाम पर ये स्कूल उन्हें लगातार ठगने का काम कर रहे हैं. जबकि मान्यता लेते समय किये गये अनुबंधों की लगातार अवहेलना भी करते रहते हैं.
सरकारी स्कूलों की स्थिति दिन प्रतिदिन पुरे देश में अच्छी हो रही है. बिहार के बाद हम बात करते हैं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तो वहाँ भी सीबीएसई बोर्ड के सरकारी स्कूलों के 94 प्रतिशत से अधिक परीक्षार्थी पास हुए हैं. दिल्ली के इन स्कूलों में 1997 से 2006 तक कभी भी 80 प्रतिशत बच्चे पास नहीं हो पाये थे पर 2007 से इसमें लगातार सुधार हुआ है. सीबीएसई बोर्ड के दिल्ली स्थित सरकारी स्कूलों के 98 में 63.45% परीक्षार्थी उतीर्ण हुए थे, 2004 में 77.8%, 2014 में 88.11%, 2018 में 90.68% और 2019 में 94.29% परीक्षार्थी पास हुए हैं.

सीबीएसई के 12वीं के घोषित रिजल्ट में कुल 83.4% बच्चे पास हुए. लड़कियों ने बाजी मारते हुए कुल 88.7% सफल रहीं वहीं लड़कों का पास प्रतिशत 79.40% प्रतिशत मात्र रहा. कुल 12 लाख 87 हजार छात्र- छात्राओं ने लगभग पांच हजार केंद्रों पर परीक्षा दी थी. गाजियाबाद की हंसिका शुक्ला और मुजफ्फरनगर की करिश्मा अरोरा ने 499 अंक प्राप्त कर पहला स्थान हासिल किया. जबकि 498 अंक प्राप्त कर ऋषिकेश की गौरांगी चावला, रायबरेली की ऐश्वर्या एवं जींद की भव्या ने सेकेण्ड पोजीशन अपने नाम किया. कुल 94 हजार 299 स्टूडेंट्स ने 90 परसेंट से अधिक मार्क्स पाए. इस वर्ष 12 वीं के नतीजों में सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन काफी शानदार रहा. केन्द्रीय विद्यालय का रिजल्ट 98.54% और जवाहर नवोदय विद्यालय का रिजल्ट 96.62% है.
त्रिवेंदरम ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया जिसके 98.20% परीक्षार्थी उतीर्ण हुए, कुल 37098 रजिस्टर्ड स्टूडेंट्स में 36992 स्टूडेंट्स ने परीक्षा दिया और 36326 पास हुए. चेन्नई से कुल 83085 रजिस्टर्ड स्टूडेंट्स में 82719 ने परीक्षा दिया और 92.83 % यानी 76873 बच्चे पास हुए. दिल्ली के 262710 स्टूडेंट्स में 259868 ने परीक्षा दिया और 91.87% कुल 238729 पास हुए. पंचकुला से 202349 स्टूडेंट्स में 201220 ने परीक्षा दिया और 87.41% कुल 175883 पास हुए. अजमेर से 142574 में 141910 ने परीक्षा दिया और 85.36% यानी 121131 पास हुए.
वहीं नीचे के पांच पायदान पर रहने वाले क्षेत्रों में भुवनेश्वर से 67062 स्टूडेंट्स में 66149 ने एग्जाम दिया 82.62% कुल 54653 पास हुए. देहरादून के 116866 स्टूडेंट्स में 115480 ने परीक्षा दिया. 88895 बच्चे कुल 76.98% पास हुए. प्रयागराज से 155605 स्टूडेंट्स में 153216 ने एग्जाम दिया और 73.95% कुल 113301 बच्चे पास हुए. गुवाहाटी के 48432 स्टूडेंट्स में 47232 स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिया और 68.69% कुल 32442 पास हुए. पटना से 102612 स्टूडेंट्स रजिस्टर्ड थे, इनमें 100698 स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिया और मात्र 66.73% कुल 67194 परीक्षार्थी पास हुए.
सीबीएसई शिक्षा का एक केन्द्रीय सरकारी बोर्ड है, जिसकी स्थापना 3 नवंबर 1962 को हुई थी. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, 2017 के आंकड़ों के अनुसार बोर्ड से देशभर के 19,316 स्कूल संबद्ध थे.


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