बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गुप्तेश्वर पांडेय ने समय से पहले सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए आवेदन किया। भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी पांडेय की वीआरएस अर्जी को राज्यपाल ने स्वीकार कर केंद्रीय सरकार को भेज दिया। राज्य सरकार ने बीते देर रात होमगार्ड के डीजी संजीव कुमार सिंघल को डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार संभालने का आदेश जारी कर दिया है। गुप्तेश्वर पांडेय वीआरएस लेकर राजनीति में जाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। उनके बक्सर या आरा से विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना है। पांडेय ने 2009 में भी वीआरएस लेकर बक्सर से लोकसभा चुनाव लड़ने की कोशिश की थी। तब टिकट नहीं मिलने पर वीआरएस का आवेदन वापस लेकर नौकरी में लौट आये थे। ज्ञात है कि सेवानिवृत्त आईपीएस सुनील कुमार भी हाल ही में जदयू में शामिल हो चुके हैं। जदयू उन्हें गोपालगंज जिला के भोरे सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़वाने वाली है। फिलहाल उनके भाई अनिल कुमार वहां से कांग्रेस विधायक हैं। उधर भाई के चुनावी जंग में उतरने पर अनिल कुमार ने स्वयं भी उनका साथ देने सम्बन्धी बयान दिया है। सुशांत सिंह राजपूत मामले में आरोपी रिया चक्रवर्ती के अधिवक्ता सतीश मानेशिंदे ने बिहार के डीजीपी के वीआरएस लेने पर तंज कसते हुए कहा कि बिहार सरकार और केंद्र सरकार ने डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की ओर से वीआरएस के लिए दायर अर्जी पर 24 घंटे से भी कम समय में फैसला ले लिया। यह ठीक वैसे ही है जैसे बिहार सरकार ने रिया के खिलाफ एफआईआर सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया था और केंद्र ने इसे तुरन्त मंजूरी दे दी थी। रिया के वकील ने साथ ही कहा कि यह जस्टिस फॉर सुशांत सिंह राजपूत नहीं, बल्कि जस्टिस फॉर गुप्तेश्वर पांडेय है। ज्ञात है कि सुशांत केस मामले में बिहार में दर्ज हुई एफआईआर और जांच के लिए पुलिस टीम के मुंबई भेजने के बाद से ही डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गए थे। गुप्तेश्वर पांडेय शुरू से ही मीडिया में भी लगातार एक्टिव रहे हैं। पांडेय ने रिया को लेकर कहा था कि उनकी औकात नहीं है कि वो नीतीश कुमार पर टिप्पणी करें। रिया चक्रवर्ती को सुशांत केस में ड्रग्स एंगल की जांच कर रही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) गिरफ्तार कर चुकी है। गुप्तेश्वर पांडेय ने 2009 में आईजी रहते हुए भी बक्सर लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए वीआरएस लिया था, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर वापस सेवा में आने की अर्जी दी थी। जिसे 9 महीने बाद नीतीश कुमार सरकार ने मंजूर कर लिया था। पांडेय को 2019 में उन्हें बिहार का डीजीपी बनाया गया था।
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