देश के बैंको में लगातार बढ़ती बैकिंग धोखाधड़ी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. वास्तव में यह आम जनता की गाढ़ी कमाई है जो धोखाधड़ी के नाम पर लुट रही है. पिछले चार साल में ही बैकिंग घोटाले के 19 हजार से अधिक दर्ज मामलों में एक लाख करोड़ से अधिक की धनराशि धोखाधड़ी की भेंट चढ़ गई. अकेले PNB में चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में ही बैंक के 1500 करोड़ रुपए से ज्यादा धोखाधड़ी के भेंट चढ़ गये हैं.
PNB में फ्रॉड का एक नया मामला सामने आया, चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में ही बैंक के 1500 करोड़ रुपए से ज्यादा धोखाधड़ी को भेंट चढ़ गया है. नीरव मोदी और मेहुल चौकसी द्वारा हजारों करोड़ रुपए का चूना लगाने के बावजूद PNB के उच्चाधिकारियों की यह लापरवाही कई सवालों को जन्म देती है.
एक आरटीआई के जवाब में PNB ने बताया कि अप्रैल 2018 से सितंबर 2018 तक बैंक में फ्रॉड की 115 घटनायें सामने आयी हैं, जिनमें बैंक के 1523.03 करोड़ रुपये डूब गए हैं. मध्यप्रदेश के RTI कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने PNB से पूछा था कि अप्रैल 2018 से सितंबर 2018 तक उसके यहां धोखाधड़ी के कितने मामले सामने आए और इन मामलों में बैंक का कितना पैसा डूबा?
इसके जवाब में PNB ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में बैंक में धोखाधड़ी के 58 मामले सामने आए और 32795.83 लाख रुपये इसकी भेंट चढ़ गए. वहीं दूसरी तिमाही में सामने आए 57 मामलों में बैंक को कुल 119507.84 करोड़ रुपयों का चूना लगा. एक ओर बैंक के सैकड़ों करोड़ रुपये धोखाधड़ी के भेंट चढ़ गये तो दूसरी ओर इसी दौरान ग्राहकों को भी जबरदस्त चूना लगा. बैंक ने ही RTI में बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी की 62 घटनाएं सामने आईं जिनमें ग्राहकों को 4.45 करोड़ रुपये का चूना लगा. ज्ञात है कि PNB के ग्राहक अक्सर ATM में धोखाधड़ी की शिकायत करते रहते हैं, पर बैंक ने अपने ATM में कोई सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाया. बैंक ने RTI में ही स्वीकार किया है कि वह अपने बैंक के ATM में सुरक्षा के लिए किसी भी तरह के गार्ड आदि की तैनाती नहीं करता है.
रोज नये घोटालों की वजह से PNB की कमर टूट चुकी है, इसके बावजूद बैंक सावधान होने का नाम नहीं ले रहा है. घोटालों के चलते वर्तमान वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में PNB को 940 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, पिछले वर्ष 2017-18 के इसी अवधि में बैंक को 343.40 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था.


हाल ही में देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक PNB 11 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला सामने आया था तो बैंक ने अपने ही कुछ अधिकारियों सहित डायमंड कारोबारी नीरव मोदी, उसकी पत्नी ऐमी, नीरव मोदी के भाई निशाल और नीरव के रिश्तेदार मेहुल चोकसी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. तब PNB ने कहा था कि नीरव मोदी और अन्य ने जाली लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग के जरिये बैंक को 11,334 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया है. नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के देश छोड़ने के बाद इस मामले पर काफी हंगामा भी हुआ था. बैंक कि कार्य प्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किये गए थे. इन सबके बावजूद PNB में धोखाधड़ी जारी है, एक के बाद एक नये मामले सामने आते जा रहे हैं.
देश के बैंको में लगातार बढ़ती बैकिंग धोखाधड़ी की घटनाओं के बारे में सरकार ने एक सवाल के जवाब में बताया कि पिछले चार साल के भीतर बैकिंग घोटाले के 19 हजार से अधिक मामले दर्ज हुए. जिसमें एक लाख करोड़ से अधिक की धनराशि धोखाधड़ी की भेंट चढ़ गई. बैंकों को एक लाख रुपये से अधिक की धनराशि से जुड़ी हर धोखाधड़ी की रिपोर्ट RBI को देनी होती है और उसी के आधार पर देश में हुई तमाम धोखाधडी के आंकड़े RBI ने दिए हैं.
संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र के दौरान गुजरात में वडोदरा से भाजपा सांसद रंजनबेन पटेल ने सरकार से यह बताने को कहा था कि देश में बैकिंग घोटाले से जुड़े कितने मामले अब तक आए और इसमें कुल कितनी धनराशि शामिल है. इसी का जवाब देते हुए सरकार ने बताया कि पिछले चार वर्षों में कुल 19102 शिकायतें मिलीं, जिसमें 1 लाख 14 हजार 221 करोड़ रुपये की धनराशि शामिल है. 2015-16 के कुल 4693 मामलों में 18699 करोड़ रुपये, 2016-17 में 5076 मामलों में 23,934 करोड़ और 2018-19 के 30 सितंबर यानी पहली छमाही में 3,416 मामलों में 30,420 करोड़ रुपये धोखेबाजी की भेंट चढ़ी है.
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिवप्रताप शुक्ला के अनुसार देश में बैकिंग फ्रॉड की रोकथाम के लिए RBI की ओर से सभी बैंकों को एक सर्चेबल ऑनलाइन केंद्रीयकृत डेटाबेस (केंद्रीय धोखाधड़ी रजिस्ट्री यानी CFR) तैयार किया गया है. जिसके जरिए बैंकों और चुनिंदा वित्तीय संस्थाओं की ओर से दर्ज धोखाधड़ी के मामलों की निगरानी की जाती है. इसके अलावा राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण की स्थापना का काम शुरू हुआ है. अधिक धनराशि वाले बैंक खातों की ऑडिट होने की भी व्यवस्था है. 50 करोड़ से अधिक की हैसियत वाले निष्क्रिय पड़े बैंक खातों में धोखाधड़ी की आशंका ज्यादा होती है, ऐसे में इस तरह के खातों की खास निगरानी करने का भी RBI ने संबंधित बैंकों को निर्देश दिया है.
हाँलाकि पिछले चार वर्षों में जितने भी बैकिंग घोखाधड़ी के मामले दर्ज हुए हैं, जरूरी नहीं कि वे सभी मामले उसी समय के ही हों. इसमें कई मामले पिछली सरकारों के दौरान के हैं, हालांकि उनका खुलासा या सूचना अब जाकर मिली. उदाहरणार्थ PNB की मुंबई स्थित ब्रैडी हाउस शाखा में हुई 13000 करोड़ रुपए धोखाधड़ी का खुलासा फरवरी 2018 में हुआ, जबकि यह फ्रॉड 2011 से जारी था.



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