एक लंबे प्रयास के बाद आखिरकार मुंबई की हाजी अली दरगाह में प्रतिबंधित क्षेत्र तक महिलाओं के जाने पर लगी रोक को मुंबई हाईकोर्ट ने हटा दिया है। महिलाओं को दरगाह में एंट्री दिलाने के लिए कई आंदोलन भी हुए। कोर्ट ने 2014 के एक मामले में सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है।

मुंबई हाईकोर्ट के जस्टिस वीएम कनाडे और जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे की खंडपीठ ने महिलाओं के हक में फैसला देते हुए कहा कि, संविधान में महिलाओं और पुरुषों को बराबरी का दर्जा दिया गया है। जब पुरुषों को इसके अंदर जाने की अनुमति है तो महिलाओं को भी अंदर जाने दिया जाना चा‍हिए।

मुंबई हाईकोर्ट की डबल बेंच के पास यह मामला इसी साल फरवरी से फैसले के लिए सुरक्षित था। जस्टिस कनाडे ने पिछली सुनवाई के दौरान 28 जून को फैसला सुना देने की उम्मीद जताई थी। हालांकि, 28 जून भी गुजर गया और निर्णय नहीं सुनाया जा सका।

इस मामले में याचिकाकर्ता नूरजहां सफिया नियाज की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव मोरे ने हाई कोर्ट में पैरवी की। नियाज ने अगस्त 2014 में अदालत में याचिका दायर कर यह मामला उठाया था।
उन्होंने हाई कोर्ट से सूफी संत हाजी अली के मकबरे तक महिलाओं के प्रवेश की इजाजत मांगी थी। अदालत ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से मामला सुलझाने को भी कहा था, लेकिन दरगाह के अधिकारी महिलाओं को प्रवेश नहीं करने देने पर अड़े हुए थे।

कोर्ट के फैसले के बाद सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने खुशी जताई है। उन्‍होंने कहा कि यह ऐतिहासिक और बड़ी जीत है। तृप्ति देसाई ने महिलाओं को दरगाह में एंट्री दिलाने के लिए एक बड़ा आंदोलन किया था।

हाजी अली दरगाह 15वीं शताब्दी की है। दरगाह ट्रस्ट ने 2012 में यहां महिलाओं की एंट्री पर पाबंदी लगाई थी। जिसके बाद नूरजहां नियाज और जाकिया सोमन ने पिटीशन दायर कर बैन हटाने की मांग की है। दरगाह ट्रस्ट ने पाबंदी का बचाव किया था।
शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं को एंट्री दिलाने वाली भूमाता ब्रिगेड की तृप्ति देसाई ने इसमें प्रवेश करने की बात कही थी। तृप्ति ने कुछ महीने पहले दरगाह में प्रवेश करने का प्रयास भी किया था, जिसके बाद उनके साथ धक्कामुक्की भी हुई थी।

महिलाओं की एंट्री को लेकर जस्टिस वी.एम.कानडे की खंडपीठ को हाजी अली दरगाह के कमिटी मेंबर्स ने कुछ महीनो पहले एक लैटर दिया था। उसमें कहा गया था कि मुस्लिम संत के मजार के करीब महिलाओं की एंट्री महापाप है। दरगाह कमिटी ने अदालत को बताया कि उसने इस संबंध में निर्णय लेने का जो आदेश दिया था उसके तहत दरगाह के ट्रस्टियों की दोबारा मीटिंग बुलाई गई थी।

हाजी अली दरगाह में पीर हाजी अली शाह बुख़ारी की कब्र है। पीर बुखारी एक सूफी संत थे, जो इस्लाम के प्रचार के लिए ईरान से भारत आए थे। ऐसा कहा जाता है कि जिन सूफ़ी-संतों ने अपना जीवन धर्म के प्रचार में समर्पित कर दिया और जान क़ुर्बान कर दी, वे अमर हैं। इसलिए पीर हाजी अली शाह बुख़ारी को भी अमर माना जाता है। उनकी मौत के बाद दरगाह पर कई चमत्कारिक घटनाएं देखी जाती हैं। दरगाह मुंबई के साउथ एरिया वरली के समुद्र तट से करीब 500 मीटर अंदर पानी में एक छोटे-से टापू पर स्थित है।

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