नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को झटका लगा है। शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने यंग इंडिया कंपनी की जांच इनकम टैक्स द्वारा कराए जाने को हरी झंडी दी। सोनिया और राहुल पर धोखाधड़ी और फंड के गलत इस्तेमाल के आरोप हैं।
हाईकोर्ट के जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि कंपनी को अपने दस्तावेज इनकम टैक्स को सौंपने ही होंगे। कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए कहा कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को जांच करने का अधिकार है। इस मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने जांच के आदेश दिए थे। जिसके बाद सोनिया और राहुल गांधी की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में इनकम टैक्स जांच पर रोक लगाने की मांग की गई थी। यंग इंडिया कंपनी में सोनिया और राहुल गांधी की 76 फीसदी हिस्सेदारी है।
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी नेता नलिन कोहली ने कहा कि यह गांधी परिवार के लिए एक झटका है। वो सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ जा सकते हैं लेकिन सवाल उठने तो लाजमी हैं।

भाजपा नेता सुब्रमण्यन स्वामी का आरोप है कि गांधी परिवार हेराल्ड की प्रॉपर्टीज का गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहा है। वे इस आरोप को लेकर 2012 में कोर्ट गए। लंबी सुनवाई के बाद 26 जून 2014 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी के अलावा मोतीलाल वोरा, सुमन दूबे और सैम पित्रोदा को समन जारी कर पेश होने के आदेश जारी किए थे।
नेशनल हेरल्ड अख़बार की स्थापना 1938 में जवाहरलाल नेहरू ने की थी. उस समय से यह अख़बार कांग्रेस का मुखपत्र माना जाता रहा. अख़बार का मालिकाना हक़ एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी ‘एजेएल’ के पास था जो दो और अख़बार भी छापा करती थी. हिंदी में ‘नवजीवन’ और उर्दू में ‘क़ौमी आवाज़’.
आज़ादी के बाद 1956 में एसोसिएटेड जर्नल को अव्यवसायिक कंपनी के रूप में स्थापित किया गया और कंपनी एक्ट धारा 25 के अंतर्गत इसे कर मुक्त भी कर दिया गया. वर्ष 2008 में ‘एजेएल’ के सभी प्रकाशनों को निलंबित कर दिया गया और कंपनी पर 90 करोड़ रुपए का क़र्ज़ भी चढ़ गया.
इसके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक नई कंपनी बनाई जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे, ऑस्कर फर्नांडिस और सैम पित्रोदा को निदेशक बनाया गया. इस नई कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास 76 प्रतिशत शेयर थे जबकि बाकी के 24 प्रतिशत शेयर अन्य निदेशकों के पास थे.

कांग्रेस पार्टी ने इस कंपनी को 90 करोड़ रुपए बतौर ऋण भी दे दिया. इस कंपनी ने ‘एजेएल’ का अधिग्रहण कर लिया. भाजपा के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने वर्ष 2012 में एक याचिका दायर कर कांग्रेस के नेताओं पर ‘धोखाधड़ी’ का आरोप लगाते हुए कहा कि ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ ने सिर्फ़ 50 लाख रुपयों में 90.25 करोड़ रुपए वसूलने का उपाय निकाला जो ‘नियमों के ख़िलाफ़’ है. याचिका में आरोप है कि 50 लाख रुपए में नई कंपनी बना कर ‘एजेएल’ की 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति को ‘अपना बनाने की चाल’ चली गई.
कांग्रेस के नेताओं ने अदालत में दलील दी कि ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की संस्था को ‘सामजिक और दान करम’ के कार्यों के लिए बनाया गया है. साथ ही ‘एजेएल’ के शेयर स्थानांतरित करने में किसी ‘ग़ैर क़ानूनी’ प्रक्रिया को ‘अंजाम नहीं दिया गया’ बल्कि यह शेयर स्थानांतरित करने की ‘सिर्फ एक वित्तीय प्रक्रिया’ थी.
मामले में 9 दिसंबर 2015 को सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फ़र्नांडीस और सुमन दुबे पटियाला हाउस कोर्ट में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुए. फिर उन्हें ज़मानत मिल गई. बाद में फरवरी 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने इस सभी पाँच लोगों को अदालत में निजी तौर पर पेश होने से छूट तो दे दी लेकिन मामले को रद्द करने से मना कर दिया था.

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