कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कि चुनौती स्वीकारते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने एचएएल से हुई डील के दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए राहुल को चुनौती दिया कि अब वे गुमराह करने के लिए संसद के सामने देश से माफ़ी मांगेंगे और इस्तीफा देंगे?
राहुल गांधी ने PM मोदी को बचाने के लिए सीतारमण पर संसद में झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए चुनौती दी थी कि या तो वे सबूत दिखायें या इस्तीफा दें. कांग्रेस अध्यक्ष ने रक्षा मंत्री पर आरोप लगाया था कि उन्होंने PM को बचाने के लिए संसद में एचएएल को एक लाख करोड़ रुपये की खरीद का आदेश देने पर झूठ बोला था. साथ ही दावा किया कि एचएएल का कहना है कि उसे एक पैसा भी नही मिला है. राहुल ने रक्षा मंत्री पर आरोप लगाते हुए उनसे सबूत दिखाने या इस्तीफा देने की चुनौती दी थी, जिसे स्वीकारते हुए निर्मला सीतारमण ने एचएएल से हुई डील के दस्तावेज सार्वजनिक किए.
रक्षा मंत्री ने इस संदर्भ में एक ट्वीट करते हुए बताया कि कब और कितने पैसों की रक्षा डील एचएएल से की गई है. दस्तावेज जारी करते हुए रक्षा मंत्री ने दावा किया कि 2014 से 18 के बीच एचएएल ने 26570.8 करोड़ के सौदे साइन किए हैं और 73000 करोड़ की डील पाइपलाइन में हैं. साथ ही रक्षा मंत्री ने राहुल को चुनौती देते हुए कहा कि क्या अब राहुल गांधी संसद के सामने देश से मांगेंगे और इस्तीफा देंगे?


इससे पहले राहुल गांधी ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को ट्वीट कर चुनौती देते हुए कहा था कि सबूत दिखाएं या फिर इस्तीफा दें. राहुल गांधी ने ट्वीट कर लिखा था- जब आप एक झूठ बोलते हैं, तो आपको पहले झूठ को छिपाने के लिए और अधिक झूठ बोलना पड़ता है. PM के राफेल झूठ का बचाव करने की उत्सुकता में, रक्षा मंत्री ने संसद में झूठ बोला. रक्षा मंत्री को एचएएल को एक लाख करोड़ के सरकारी आदेश दिखाने होंगे या वे इस्तीफा दें.
राहुल गांधी ने एक मीडिया रिपोर्ट के आलोक में सरकार पर निशाना साधा था. जिसमें दावा किया गया है कि ‘एचएएल के पास एक लाख करोड़ रुपये में से एक भी रुपया नहीं आया है, अब तक एक भी ऑर्डर पर हस्ताक्षर नहीं किया गया है.’ रिपोर्ट में एचएलएल प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी को उद्धृत किया गया है. उसमें यह भी दावा है किरक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनी एचएएल वित्तीय संकट से जूझ रही है और अपने कर्मियों को तनख्वाह देने के लिए धन उधार लेने को मजबूर है.
उधर सरकार ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने अपने शासनकाल में एचएएल का समर्थन नहीं किया और अब NDA की सरकार रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम को मजबूत कर रही है.



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