RSS प्रमुख ने राम मंदिर को लेकर कहा कि हमारे खिलाफ कोई मत पंथ नहीं खड़ा है। रामजन्म भूमि पर राम मंदिर बने, इसको इस्लाम की मनाही नहीं है, इसको ईसाईयत भी मना नहीं करती। इसको मना करती है इस्लाम और ईसाईयत के नाम पर चलने वाली राजनीति, उनके नाम पर चलने वाला कट्टरपंथ और उनके नाम पर चलने वाली गुंडागर्दी। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा था कि राम मंदिर मसले का हल सुप्रीम कोर्ट से निकाला जाए।
भागवत झारखंड के देवघर में धर्म संस्कृति रक्षा समिति के विराट हिंदू समागम में शामिल हुए थे। जिसमें राम मंदिर का मुद्दा छाया रहा। भागवत ने कहा कि अपने आप को हिंदू कहने वाले लोग जागृत हो जाएं, ये पूरे दुनिया की इस देश की साथ में हमारी और आपकी भी आवश्यकता है। जहां राम जन्मे थे यह युगों-युगों से मान्यता है। जिसकी कोई कोर्ट में चिकित्सा नहीं हो सकती। जो श्रद्धा का विषय है और सभी भारतीयों की श्रद्धा है।भागवत ने कहा कि अयोध्या में रामजन्म भूमि पर राम का जन्म हुआ, वहीं पर हम उनका मंदिर चाहते हैं। इसके लिए हमको इतना क्यों लड़ना पड़ता है। हमारे खिलाफ कोई मत पंथ खड़ा नहीं है। मंदिर के लिए इस्लाम की मनाही नहीं है। इसको ईसाईयत मना नहीं करती। इसको मना करती है इस्लाम और ईसाईयत के नाम पर चलने वाली राजनीति, उनके नाम पर चलने वाला कट्टरपंथ और उनके नाम पर चलने वाली गुंडागर्दी।
इसके पूर्व भागवत ने कहा था कि पूरे देश में गोहत्या पर रोक लगाने वाला कानून होना चाहिए। उन्होंने गोरक्षक समूहों को नसीहत भी दी कि गाय की रक्षा करते हुए कानून का पालन करना चाहिए। भागवत, दिल्ली में महावीर जयंती पर एक प्रोग्राम में शामिल हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने 21 मार्च को कहा कि राम मंदिर पर सभी संबंधित पक्ष मिलकर बैठें और आम राय बनाएं। बातचीत नाकाम रहती है तो हम दखल देंगे। दूसरी तरफ, सुब्रमण्यम स्वामी ने अयोध्या विवाद के हल के लिए एक फॉर्मूला सुझाते हुए कहा कि मस्जिद सरयू नदी के पार बनाई जानी चाहिए। जबकि मंदिर वहीं बनना चाहिए, जहां रामलला विराजे हैं। वहीं, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के जफरयाब जिलानी ने कहा कि 1986 से अब तक हुई बातचीत बेनतीजा रही है। लिहाजा आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट मुमकिन नहीं है।
मोदी सरकार ने बार-बार यही कहा है कि राम मंदिर को संविधान के दायरे में रहकर ही बनाया जा सकता है। उधर UP असेंबली इलेक्शन में भाजपा को मिली बड़ी जीत को RSS नेता एमजी वैद्य ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मैन्डेट बताया था। चुनाव नतीजों के बाद वैद्य ने कहा था कि बीजेपी के मैनिफेस्टो में भी अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे का जिक्र है। इसलिए ये माना जाना चाहिए कि राम मंदिर बनाने को लेकर जनता ने अपनी मंजूरी दे दी है। अगर सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे को हल नहीं कर पाता है तो एनडीए सरकार को राम मंदिर बनाने के लिए कानून बनाना चाहिए।



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