आवारा घूम रही गायों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार अब हर ग्राम पंचायत में कम से कम 1000 क्षमता वाले गोवंश आश्रय स्थल बनवाएगी. इसमें रहने वाले मवेशियों के रखरखाव के खर्च के लिए सरकार शराब सहित अन्य चीजों पर गो कल्याण सेस लगाएगी.
ऊर्जा मंत्री व सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि सभी ग्रामीण और शहरी निकाय में अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल खोले जाएंगे. इसमें सभी ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम शामिल हैं. सरकारी जमीन पर यह आश्रय स्थल मनरेगा के जरिए बनवाए जाएंगे, इसमें संबंधित ग्रामीण व शहरी निकायों की निधि व विधायक और सांसद विकास निधि का भी इस्तेमाल होगा.
सरकार का लक्ष्य है कि गो कल्याण सेस के जरिए साल में लगभग 300-400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी जिसे गायों की देखभाल में लगाया जाएगा. यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया. सरकार स्थानीय निकायों को इसके लिए 100 करोड़ रुपये पहले ही जारी कर चुकी है. साथ ही सभी कांजी में केयर टेकर तैनात किए जाएंगे. इसके लिए ब्लॉक स्तर पर बीडीओ, तहसील स्तर पर एसडीएम, जिला स्तर पर डीएम और शासन स्तर पर मुख्य सचिव स्तर की स्टेट स्टेयरिंग कमिटी बनेगी. कांजी हाउस बनने के बाद उनका संचालन गो कल्याण सेस की आय से होगा.
श्रीकांत शर्मा ने बताया कि आबकारी विभाग में मौजूदा राजस्व के अलावा सेस लगाया जाएगा. मंडी शुल्क से होने वाली आय का 2 फीसदी हिस्सा इसमें खर्च होगा, पहले 1 फीसदी राशि ही खर्च की जाती थी. फायदे में चल रहे उपक्रमों व निर्माण संस्थानों मसलन राजकीय निर्माण निगम, सेतु निगम, यूपीएसआईडीसी भी अपने मुनाफे से आधा फीसदी गो कल्याण के लिए देंगे. यूपिडा के लगाए जा रहे टोल टेक्स में भी 0.5 फीसदी अतिरिक्त गो कल्याण सेस लिया जाएगा, जो फिलहाल लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे पर टोल वसूलती है.
श्रीकांत शर्मा ने कहा कि सरकार गोवंश के संरक्षण व किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है साथ ही गोकशी नहीं होने देगी. जहां भी सरकारी स्कूलों या अस्पतालों में गोवंश बांधने व उस दौरान मृत्यु की घटनाएं हुई हैं उन जिलों के डीएम व एसपी को जांच के आदेश दिए गए हैं, जो भी दोषी होगा उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.



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