मैथिली सहित देश की अन्य सभी लोक भाषाओं ने राष्ट्रभाषा हिन्दी को समृद्ध बनाया है। ‘रामचरित मानस’ की अतिशय लोकप्रियता का आधार उसका लोकभाषा में रचित होना भी है। दोनों पुस्तकों को लोकार्पित करते हुए राज्यपाल कोविन्द ने मैथिली भाषा की मिठास, रूचिरता और लालित्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसका साहित्य अत्यंत समृद्ध और लोक-जीवन से जुड़ा हुआ है।उन्होंने मैथिली-कोकिल विद्यापति को उद्धृत करते हुए कहा कि ‘देसिल बयना सब जन मिट्ठा।’ राज्यपाल ने कहा कि संपूर्ण भारतीय वांगमय और भारतीय संविधान हमें समतावादी और समरस समाज के निर्माण तथा भाईचारे का संदेश देते हैं। समस्त भाषाओं के भारतीय साहित्य से भी हमें शांति, सद्भावना और बंधुत्व की प्रेरणा मिलती है। राज्यपाल ने ‘ओ कविता की ?’ के कवि गणेश झा को बधाई दी तथा ‘मैथिली आओर पाँच ठाकुर’ के लेखक स्व0 डाॅ0 सुरेश्वर झा का पुण्य स्मरण करते हुए उनके सारस्वत अवदान का नमन किया। कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सदस्य डाॅ0 सीपी ठाकुर ने कहा कि आर्थिक सम्पन्नता से वंचित मिथिला की भूमि सांस्कृतिक एवं साहित्यिक रूप से अत्यंत समृद्ध और विकसित रही है। डाॅ0 ठाकुर ने मिथिला क्षेत्र के विकास के लिए वहाँ समुचित जल-प्रबंधन की व्यवस्था पर जोर दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कवि गणेश झा ने कहा कि- ‘मैथिली आओर पाँच ठाकुर’ नामक पुस्तक में ज्योतिरीश्वर ठाकुर, विद्यापति ठाकुर, ब्रजमोहन ठाकुर, कर्पूरी ठाकुर एवं डाॅ0 सीपी ठाकुर के मैथिली भाषा के विकास में योगदान को रेखांकित किया गया है, जबकि ‘ओ कविता की ?’ में देश और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर कई महत्वपूर्ण कविताएँ संकलित हैं। कार्यक्रम में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्य्रालय के कुलपति डाॅ0 साकेत कुशवाहा, प्रधान सचिव डाॅ0 बाला प्रसाद, विधायक संजय सरावगी, विधायक जीवेश मिश्र, पूर्व विधायक गोपाल जी ठाकुर, स्व0 लेखक डाॅ0 सुरेश्वर झा की धर्मपत्नी रम्भा झा, प्रो0 शबनम ठाकुर, दीपक ठाकुर, संजीव कुमार मिश्र, मिथिलेश कुमार आदि भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन चंद्रमणि झा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विधायक संजय सरावगी ने किया।

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