UPA की मनमोहन सिंह सरकार ने 2013 में हर महीने 9000 फोन कॉल्स और 500 ईमेल्स की निगरानी करवाई थी. RTI से हासिल जानकारी में यह खुलासा हुआ है.
दिल्ली के प्रसुनजीत मंडल ने 6 अगस्त 2013 को RTI दाखिल किया था. इसके जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा था कि UPA सरकार ने हर महीने 7500 से 9000 फोन कॉल्स और 300 से 500 ई-मेल संदेशों पर नजर रखने के आदेश दिए थे. बताया गया कि मुंबई हमले के बाद यह आदेश दिया गया था।
शारदा सर्वज्ञ पीठ के स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ ने द्वारा 24 दिसंबर 2013 को लगाये गये एक RTI के जवाब में बताया गया कि इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) समेत नौ जांच एजेंसियां भारतीय टेलीग्राफ एक्ट 1885 के तहत लोगों के ईमेल और फोन कॉल्स पर नजर रखती रही थीं
दीपक श्रीवास्तव उवाच:- यह कंफ्यूजन जो बरकरार है,यही हिंदू धर्म है और इस धर्म की अपने देवताओं पर भी कई तरह का बयान सुनने,मजाक कर लेने,वाद विवाद कर लेने की ताकत हीं है जो देश में धर्मनिरपेक्षता को भी बनाये हुये है,वर्ना पैगम्बर मोहम्मद साहब की तस्वीर बना देने पर बम विस्फोट करने जैसी बुद्धि हिंदू धर्म के मानने वालों की भी हो जाये तो बुककल नवाब अब तक साफ हो गये रहते,देश के किसी भी दल की हिम्मत नहीं होती की धर्मनिरपेक्ष बनता,आखिर 85%हिंदू ही तो हैं?इसको बने रहने दें,आपके लिये,देश के लिये,सबके लिये अच्छा है,आज 20% हिंदू सांप्रदायिक सोच की तरफ बढ़ रहे हैं जिसके जिम्मेदार जितना भाजपा/संघ का प्रयास है उससे ज्यादा मुस्लिम समाज के धरमांध लोग भी हैं,यह प्रतिशत बढ़े नहीं इसकी जिम्मेदारी सबकी है ,यह भी विचार करना होगा,धन्यवाद!
,बीजेपी के बाप की औकात नहीं है रोक लेने की अगर हिंदू धार्मिक रूप से सांप्रदायिक होते ,हिंदू धर्म के मानने वालों में धर्म को लेकर कोई संकीर्णता नहीं है,हाँ जातिवादी संकीर्णता है,यही लोग किसी भी बहुसंख्यक जातियों के किसी बड़े नेता के बारे में ऊलजलूल बोल कर दिखायें,हंगामा-तोड़-फोड़ सब होगा,कोई रोक नहीं सकता है!
सच्चाई बताया है,हमलोग तो अपने देवताओं पर मजाक भी बना लेते हैं,यह हमारी ख़ूबी है जिसे कुछ लोग कमजोरी भी मानते हैं,हांलाकि इससे देश को फायदा है कि हम हिंदू पाकिस्तान नहीं बने,जबकि बनाने का प्रयास किया जा रहा है!



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