मध्य प्रदेश में अब नया वित्तीय वर्ष एक जनवरी से शुरू होकर 31 दिसंबर को समाप्त होगा। नयी व्यवस्था 1 जनवरी 2018 से लागू हो जाएगी।
प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बैठक के फैसलों के बारे में बताते हुए कहा कि सरकार ने नया वित्तीय वर्ष एक अप्रैल की जगह 1 जनवरी से शुरू होने और 31 दिसंबर को समाप्त होने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मौजूदा वित्तीय वर्ष 2017-18 के बजट का इस्तेमाल दिसंबर 2017 तक अनिवार्य रूप से करने के लिए रोडमैप बनाने का निर्देश भी अधिकारियों को दे दिया है। नए वित्तीय वर्ष की दृष्टि से विधानसभा का बजट सत्र भी अब फरवरी की जगह दिसंबर में ही शुरू होगा।
केंद्र से मिलने वाली आर्थिक मदद, उपयोगिता प्रमाण-पत्र समय पर भेजने आदि के संदर्भ में दो साल की कार्ययोजना बनाने के मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में सभी मंत्री और अधिकारियों के साथ बैठक भी की है। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा है कि अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही व्यवस्था को बदलने की जरूरत है। नई व्यवस्था से कैलेंडर और वित्तीय वर्ष एक हो जाएंगे। इससे विभागों को काम करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे दो साल का रोडमैप बनाएं। इसमें जन संकल्प (भाजपा का 2013 विधानसभा चुनाव का घोषणा पत्र) और घोषणाओं का ध्यान रखा जाए। कार्ययोजना ऐसी हो, जो पूरी की जा सके। सभी मंत्री इसकी निगरानी करें। हर तीन माह में समीक्षा होगी। प्रत्येक मंगलवार को कैबिनेट के बाद एक विभाग का प्रस्तुतिकरण होगा। इसमें विभागों से जुड़े मुद्दे भी शामिल होंगे। विभागों को ये बताना होगा कि नई योजना क्या हो सकती है। इसका किस वर्ग पर क्या असर पड़ेगा। गरीब कल्याण को लेकर कौन-सी योजना लागू की जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार प्रदेश सरकार ने केंद्र को वित्तीय वर्ष में बदलाव करने को लेकर करीब 9-10 माह पहले ही सहमति दे दी थी। केंद्र ने जब वित्तीय वर्ष में बदलाव करने की प्रक्रिया शुरू की तो प्रदेश सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए इसकी घोषणा कर दी।
सूत्रों का कहना है कि वित्तीय वर्ष की व्यवस्था बदलने से विभागों को मैदानी कामकाज के लिए पांच माह (जनवरी से मई) का समय मिलेगा। अभी एक अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष लागू होता है और विभागों को मैदानी काम करने के लिए सिर्फ मई या अधिकतम 15 जून तक का समय मिल पाता है। इसके बाद सितंबर तक काम बंद रहता है।
वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था को बनाने के लिए कई नियम और अधिनियमों में बदलाव करना होगा। सबसे पहले यह तय करना होगा कि एक जनवरी से 31 मार्च तक के बजट का क्या और कैसे इस्तेमाल किया जाएगा, क्योंकि पूरा बजट मौजूदा वित्तीय वर्ष को देखते हुए बनाया गया है। वेट की गणना आदि कई और प्रावधान हैं, जिन्हें सरकार को बदलना पड़ेगा।
अंग्रेजी हुकूमत की शुरू की हुई अप्रैल से मार्च के बीच वित्त वर्ष की दशकों पुरानी परंपरा को खत्म करते हुए मध्य प्रदेश की सरकार का यह अहम फैसला लेने वाला मध्य प्रदेश पहला राज्य हैl प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त वर्ष की अवधि जनवरी से दिसम्बर करने की अपील कर चुके हैंl इसके अलावे संसद की एक समिति ने भी देश में वित्त वर्ष की अवधि बदलने की सिफारिश की हैl
भारत के वित्त वर्ष को ब्रिटेन सरकार के वित्त वर्ष के साथ मिलाने के उद्देश्य से वित्त वर्ष की मौजूदा व्यवस्था भारत में 1867 में लागू की गई थीl 1867 से पहले भारत में वित्त वर्ष एक मई से शुरू होता था और अगले साल 30 अप्रैल को समाप्त होता थाl
इससे पहले केंद्र सरकार ने इसी वर्ष आम बजट पेश करने की परंपरा को तोड़ते हुए एक महीना पहले बजट पेश किया, ताकि संबंधित मंत्रालय वित्त वर्ष शुरू होने के साथ ही आवंटित धन खर्च करना शुरू कर सकेंl

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