महिलाओं को जो लोग कमजोर मानते हैं, ये खबर उनकी आंखें खोल देगी. अकसर महिलाओं के बारे में कहा जाता है कि महिलाएं शारीरिक रूप से कमजोर होती हैं, उनके अंदर स्टेमिना नहीं होता. लेकिन एक उदाहरण ऐसा भी है, जिसके बारे में जानकर आपकी ये सोच सदा के लिए खत्म हो जाएगी. ये महिला पिछले 37 साल से प्रत्येक वर्ष चार बार लगभग 105 किलोमीटर पैदल चलती है. एक बात और, ये इतना लंबा सफर महज़ 15 घंटे में पूरा कर लेती हैं. कहते हैं, जज़्बा और जूनून हो तो इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं. आज जहां दो कदम चलने में लोगों के पसीने छूटने लगते हैं, भगवान की पूजा-पाठ करने भी लोग एयरकंडीशन गाड़ियों से जाते हैं, वहीं जीवन के 68 वसंत पार कर चुकी पेशे से शिक्षिका रहीं मुज़फ़्फ़रपुर की कृष्णा बम पिछले 37 सालों से सावन में प्रत्येक रविवार को पैदल डाक बम के रूप में झारखंड की पथरीली पहाड़ियों को पार कर बाबा को जल चढ़ाने जाती हैं.
कांवर यात्रा को लेकर कृष्णा बम कहती हैं कि विवाह के बाद उनके पति नंदकिशोर पांडेय हैजा से पीड़ित हो गए थे. दिनों-दिन उनकी हालत खराब होती जा रही थी. तब उन्होंने संकल्प लिया कि पति के ठीक होने पर वह कांवर लेकर हर साल सावन में बाबा वैद्यनाथ का जलाभिषेक करेंगी. भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना सुन ली. तभी से वे हर साल जलाभिषेक करने जाती हैं. इतना ही नहीं, साइकिल से वे 1900 किलोमीटर तक वैष्णोदेवी की यात्रा भी कर चुकी हैं. साथ ही हरिद्वार से बाबाधाम, गंगोत्री से रामेश्वर व कामरूप कामख्या तक साइकिल से ही गई हैं.

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