मेघालय हाईकोर्ट के जज एसआर सेन ने बुधवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि विभाजन के समय भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन हम धर्मनिरपेक्ष बने रहे. उन्होंने PM मोदी और प० बंगाल की मुख्यमंत्री ममला बनर्जी से यह सुनिश्चित करने की अपील की, कि भारत इस्लामिक देश न बन जाए.
जस्टिस सेन की टिप्पणी पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के अलावा शिवसेना के सांसद संजय राउत ने भी विभाजन के समय भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिए जाने की बात का समर्थन किया है. राज्यसभा सांसद और संघ विचारक राकेश सिन्हा ने कहा कि भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र इसलिए है क्योंकि यहां पर हिंदू समाज बहुसंख्यक है. वहीं NCP नेता माजिद मेमन ने कहा कि इस तरीके की बातें करने वाले जस्टिस सेन को इस्तीफा देना चाहिए.
जस्टिस सेन ने PM, गृहमंत्री और संसद से ऐसा कानून लाने की सिफारिश की है, जिससे पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान से आने वाले हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी आदि को बिना किसी सवाल या दस्तावेज के भारत की नागरिकता मिल सके. कोर्ट ने फैसले में लिखा कि- पाक ने खुद को इस्लामिक देश घोषित किया, हमें भी हिंदू राष्ट्र घोषित करना चाहिए था.
अमन राणा नामक एक व्यक्ति को निवास प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया गया था. उसने एक याचिका दायर की थी, इसीकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फैसला दिया. कोर्ट के फैसले में जस्टिस सेन ने कहा कि तीनों पड़ोसी देशों में लोग आज भी प्रताड़ित हो रहे हैं और उन्हें सामाजिक सम्मान भी नहीं मिल रहा है. अपने 37 पेज के फैसले में जस्टिस सेन ने कहा कि तीनों पड़ोसी देशों में इन समुदाय के लोगों का उत्पीड़न हो रहा है. इनके पास कहीं और जाने का विकल्प नहीं है. ये जब भी भारत आएं, इन्हें भारत का नागरिक घोषित किया जाए.
भारत-पाक विभाजन के इतिहास के बारे में कोर्ट ने फैसले में लिखा कि यह एक अविवादित तथ्य है कि विभाजन के वक्त लाखों की संख्या में हिंदू व सिख मारे गए थे. उन्हें प्रताड़ित किया गया था और महिलाओं का यौन शोषण किया गया था. कोर्ट ने लिखा कि भारत का विभाजन ही धर्म के आधार पर हुआ था. पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक देश घोषित कर दिया था, ऐसे में भारत को भी हिंदू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए था लेकिन, इसे धर्मनिरपेक्ष बनाए रखा गया.
हालांकि, केंद्र सरकार ने नागरिकता (संशोधन) बिल 2016 में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने और भारत में छह साल से ज्यादा समय से रहने वाले हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैन, पारसी और ईसाइयों को भारत की नागरिकता के योग्य माना है. लेकिन हाईकोर्ट के आदेश में इस विधेयक का जिक्र नहीं है.
उधर जस्टिस सेन की टिप्पणी पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के अलावा शिवसेना के सांसद संजय राउत ने भी विभाजन के समय भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिए जाने की बात का समर्थन किया है. राज्यसभा सांसद और संघ विचारक राकेश सिन्हा ने कहा कि भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र इसलिए है क्योंकि यहां पर हिंदू समाज बहुसंख्यक है. वहीं NCP नेता माजिद मेमन ने कहा कि इस तरीके की बातें करने वाले जस्टिस सेन को इस्तीफा देना चाहिए.


शिवसेना सांसद संजय राउत ने जस्टिस की टिप्पणी पर कहा कि- ‘मेघालय हाई कोर्ट ने जो कहा है उस पर मैं यह कह सकता हूं कि मैं कोर्ट की भूमिका का स्वागत करता हूं. हमारी पार्टी हमेशा से कहती आई है कि यह हिंदू राष्ट्र है. ऐसा इसलिए क्योंकि 1947 में देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था.’ हमारे मुसलमान भाई चाहते थे कि उनके लिए अलग राष्ट्र बने तो मुसलमानों के लिए पाकिस्तान बनाया गया और जो बचा है वह हिंदुस्तान, हिंदू राष्ट्र है. उसमें कोर्ट और किसी की सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है. BJP का और हमारा भी भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का एजेंडा रहा है. राउत ने कहा कि हिंदू राष्ट्र का मतलब तालिबानी राष्ट्र नहीं है. हिंदू राष्ट्र का मतलब बेहतर सेकुलर राष्ट्र होता है. ओवैसी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी मुस्लिम लीग की तरह है.
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी जस्टिस सेन के हिंदू राष्ट्र संबंधी बयान का समर्थन करते हुए कहा कि- ‘मैं उनकी बात से पूरी तरह से सहमत हूं. मैं उन्हें साधुवाद देता हूं, धन्यवाद देता हूं. किसी संवैधानिक पर पद पर बैठे व्यक्ति ने ऐसी टिप्पणी की है, जो आज देश के अधिसंख्य नागरिक महसूस कर रहे हैं.’
राज्यसभा सांसद और संघ विचारक राकेश सिन्हा ने कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है. भारत धर्मनिरपेक्ष इसलिए है क्योंकि यहां पर हिंदू समाज है जिस दिन हिंदू समाज अल्पसंख्यक हो जाएगा, उस दिन लोकतंत्र और दूसरी चीजों पर दिक्कत हो जाएगी. सिन्हा ने कहा कि जिस प्रकार से आजादी के बाद राजनीतिक दलों ने तुष्टीकरण की नीति द्वारा लोकतंत्र में जनसांख्यिकी असंतुलन बढ़ाने की कोशिश की थी, उसका दुष्परिणाम असम और बंगाल में तथा बिहार के कुछ क्षेत्रों में दिखाई पड़ रहा है. भारत में जिस दिन हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएगा उस दिन लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती. उन्होंने ओवैसी को ISIS का भारत में पोस्टल एड्रेस बताया.
NCP नेता माजिद मेमन ने इस मुद्दे पर कहा कि विभाजन के वक्त क्या हालात थे? यह बात जस्टिस महोदय को जानना चाहिए. लगता है कि उन्होंने इतिहास पढ़ा ही नहीं है? विभाजन के समय मुसलमानों की जो घनी आबादी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोग थे, वो जिन्ना की अगुवाई में पाकिस्तान जाकर बस गए. जो करोड़ों की तादात में मुसलमान उस वक्त पाकिस्तान नहीं गए, उसकी सिर्फ यही वजह थी कि भारत एक सेकुलर मुल्क और सेकुलर संविधान के तहत चलने वाला था. जस्टिस सेन को इस तरीके की बातें नहीं करनी चाहिए. मुझे बहुत दुख होता है किसी जज का माइंडसेट इस तरीके का है. उन्होंने संविधान की शपथ ली है संविधान की शपथ लेने वाले जज को इस्तीफा देना चाहिए.



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