साल 1 984 में रोनाल्ड रीगन ने एक घोषणा करते हुए कहा था कि एक परमाणु लड़ाई कभी नहीं जीता जा सकता है और कभी लड़ा भी नहीं जाना चाहिए। जिसके बाद से परमाणु सिद्धातों पर न्यूक्लियर संपन्न देशों एक लंबा रास्ता तय करते हुए इसमें कई बदलाव लाएं। ऐसा भारत के साथ भी हुआ।
तो वहीं परमाणु हथियारों के आड़ में पाकिस्तान लगातार भारत के खिलाफ आतंकवाद का इस्तेमाल करने और क्षेत्र अशांति फैलाने के लिए कर रहा है। इसे देखते हुए अब भारत परमाणु हथियारों की नीति का इस्तेमाल करने संबंधी अपनी नीति में फिर से विचार कर सकता है। जिससे कि पड़ोसी मुल्क को उसी के अंदाज में जवाब दिया जा सके। अमरीका के एक अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अगर अब भारत और पाक के बीच युद्ध हुआ और परमाणु युद्ध के हालात बनें तो यह हमला सबसे पहले भारत की ओर से होगा।
अखबार में छपी एक लेख के मुताबिक, परमाणु हथियारों से हमले की आशंका जाहिर की जा रही है। तो इसके मुताबिक भारत लड़ाई के हालात में पाकिस्तान के पास मौजूद परमाणु हथियारों के जखीरे पर पहले हमला भी कर सकता है। या फिर ऐसी योजना बनाई जा सकती है। साथ ही कहा गया है कि भारत की नीति में आया बदलाव ना केवल उसके परमाणु हथायारों को लेकर उसकी नई सोच को जाहिर करता है, बल्कि अब पुरानी नीतियों को छोड़ भारत अपनी रक्षा के लिए पहले हमला भी कर सकता है।




इस नीति में बदलाव का इशारा पिछले साल नंबर में भारत के तात्कालिन रक्षा मंत्री ने अपने एक बयान के जरिए जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि आखिर क्यों भारत को पहले परमाणु हथियारों के प्रयोग से खुद को रोकना चाहिए। लेकिन बाद में उन्होंने इस बयान को अपनी नीजि राय बताया था। बाद में इसी मामले पर यूपीए सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे शिव शंकर मेनन ने उठाते हुए कुछ ऐसा ही इशारा किया था। उनका कहना कि परमाणु हथियारों से संपन्न मुल्क के खिलाफ भारत कब परमाणु हमला करेगा, यह अभी साफ नहीं है।
तो वहीं इस बात को और अधिक बल मिल गया जब एक कॉंफ्रेंस में विश्व के जाने माने परमाणु मामलों के जानकार विपिन नारंग ने कहा था कि भारत का शुरुआती हमला शहरों पर केंद्रीत नहीं होगा। हमला पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के ठिकानों पर सबसे पहले होगा। साथ ही कहा था कि यह पक्का है कि भारत पहले पाक को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का मौका नहीं दोगा। गौरतलब है कि यह बयान विपिन नारंग ने तब दिया था जब वह मेसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में कार्यरत थें।



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