दो हॉवित्जर तोप परीक्षण के लिए विशेष विमान से भारत लाया गया है। जैसलमेर के पोखरण में बृहस्पतिवार को परीक्षण के बाद इन्हें कश्मीर में तैनात किए जाने की संभावना है। अभी तक भारतीय सेना का प्रमुख अस्त्र बोफोर्स तोप रही है। कारगिल युद्ध में इस तोप का अहम योगदान रहा है। लेकिन बदलते परिवेश में सेना को आधुनिक हथियारों की आवश्यकता है जिसमें अमेरिका की हॉवित्जर तोप खरी उतरती है। पिछले वर्ष करीब पांच हजार करोड़ रूपये के हुए रक्षा सौदे में भारत को 145 हॉवित्जर तोप मिलनी है। परीक्षण के लिए विशेष विमान से दो हॉवित्जर तोप भारत आ गयी है। हॉवित्जर तोप का परीक्षण जैसलमेर के पोखरण में बृहस्पतिवार को होने के बाद इन्हें कश्मीर में तैनात किए जाने की संभावना है। भारतीय सेना में सम्मलित होने जा रही हॉवित्जर तोप वजन मात्र चार टन, बोफोर्स 13 टन के मुकाबले बहुत हल्की है। जिसे हेल्किॉप्टर के माध्यम से आसानी से पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है। ज्ञात है कि चीन और पाकिस्तान के भारतीय सीमा पहाड़ी क्षेत्र में काफी हैं। भारत को मिलने वाली 145 हॉवित्जर तोप में से 25 तोप तैयार मिलेंगेी जबकि बाकी का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। हॉवित्जर तोप आधुनिक तकनीक से लैस है, इसलिए इसे आॅपरेट करने के लिए केवल चार—पांच सैनिकों की ही आवश्यकता है। बोफोर्स की मारक क्षमता 20 से 25 किलोमीटर के स्थान पर हॉवित्जर की मारक क्षमता 40 किलोमीटर तक है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार हॉवित्जर तोप से एक मिनट में पांच गोले दागे जा सकते है जबकि बोफोर्स तोप से दो गोले दागे जाते हैं।

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