बिहार बोर्ड की इंटर परीक्षा के रिजल्ट ने प्रदेश की पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा दिए हैं। सिर्फ 35 फीसदी विद्यार्थी सफल हुए हैं। आर्ट्स टॉपर गणेश कुमार की योग्यता पर भी सवाल उठ रहे हैं, तो जेईई मेन क्वालीफाई कर चुके परीक्षार्थी भी फेल हैं। वहीं प्रदेश के शिक्षा मंत्री और बोर्ड के अध्यक्ष दोनों ने रिजल्ट को पारदर्शी बताया है। संघ ने इसके लिए शिक्षकों की कमी को जिम्मेवार ठहराया है।
इंटर परीक्षा के नतीजों पर संदेह को खारिज करते हुए बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने कहा कि टॉपर्स की लिस्ट में संदेह का सवाल ही नहीं है। जांच-परख के बाद टॉपरों की सूची बनाई गई है। इसे नहीं बदला जाएगा।
बोर्ड अध्यक्ष ने कला संकाय के टॉपर गणेश कुमार के बारे में कहा कि सभी टॉपर्स के साथ गणेश की कॉपियों की भी पूरी जांच हुई है। लिखित परीक्षाओं में गणेश का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है इसलिए उसके टॉपर होने में बोर्ड को कोई संदेह नहीं। हालांकि प्रैक्टिकल परीक्षाओं के बारे में पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगले साल से प्रैक्टिकल परीक्षा के दूसरे केंद्रों पर आयोजन पर विचार किया जाएगा।
बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि इंटर परीक्षा के रिजल्ट के बाद असंतुष्ट विद्यार्थी स्क्रूटिनी के लिए बोर्ड के सभी क्षेत्रीय कार्यालयों और ऑनलाइन माध्यम से 3 जून से 12 जून तक आवेदन कर सकते हैं। जून में ही स्क्रूटिनी पूरी हो जाएगी। बोर्ड मुख्यालय में उन विद्यार्थियों के स्क्रूटिनी के आवेदन लिए जाएंगे जिन्होंने किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।
शिक्षा मंत्री डॉ. अशोक चौधरी तो इंटर आर्ट्स टॉपर गणेश कुमार के सवाल पर मीडिया पर ही भड़कते हुए बोले- हद हो गई, हर बात में सिर्फ नकारात्मकता। जबरदस्ती गलती तलाशी जा रही है। रिजल्ट को गलत साबित किया जा रहा है। इसका क्या मतलब है? मंत्री ने दावा किया कि रिजल्ट बिल्कुल सही है। मीडिया, अपनी सुविधा या फायदे में गणेश का ट्रायल कर रहा है, यह गैरवाजिब है। आप मीडियाकर्मी से फिजिक्स का सवाल पूछा जाए, तो कैसा लगेगा? गणेश का रिजल्ट पूरी तरह सही होने का दावा करते हुए कहा कि पूरी जांच के बाद उसे टॉपर घोषित किया गया है। हम शिक्षा व्यवस्था को ठीक करने में लगे हैं, विपक्षी दल बच्चों को हंगामा के लिए उकसा रहे हैं।

गणेश ठाकुर टॉपर इंटरमीडिएट आर्ट्स को एनआरए (MAL) में 78, हिंदी में 92, संगीत में 83, इतिहास में 80, समाजशास्त्र में 80 और मनोविज्ञान में 59 अंक मिले हैं। गिरिडीह (झारखंड) के सरिया का रहने वाला 24 वर्षीय गणेश समस्तीपुर जिला के हायर सेकंडरी स्कूल, चकहबीब (गंगापुर) से परीक्षा में शामिल हुआ था।
खुद को टॉपर आने पर अचंभित गणेश कहता है कि उसने फॉर्म में होम साइंस सब्जेक्ट भरा था, सोशियोलॉजी नहीं। एडमिट कार्ड मिलने के बाद उसने स्कूल में आवेदन दे सुधारने की गुहार लगाई, लेकिन सुधारा नहीं गया।
उससे हुए कुछ सवाल- जवाब:- मनोविज्ञान और मनोचिकित्सक में क्या अंतर है? जवाब नहीं दे पाया, इधर-उधर की बातों में लग गया, सवाल- प्रेमचंद और फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म कहां और कब हुआ था? जवाब- नहीं पता। सवाल- उच्चारण को अंग्रेजी में क्या कहते हैं? जवाब- प्रोनाउंसेंस। सवाल- कर्नल का स्पेलिंग क्या है? जवाब नहीं नहीं दिया। सवाल- देश का उपराष्ट्रपति कौन है? जवाब- नहीं पता। वह हारमोनियम, तबला या ढोलक बजाना नहीं जानता है, सरगम के आरोह-अवरोह की जानकारी भी उसे नहीं है।
बोर्ड की इंटर परीक्षा के रिजल्ट ने पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा दिए हैं। सिर्फ 35 फीसदी विद्यार्थी साढ़े लगभग चार लाख सफल हुए हैं वहीं आठ लाख फेल हैं। साइंस में असफल कुल 4,49,279 विद्यार्थियों में से सबसे अधिक 1,69,228 विद्यार्थी अंग्रेजी विषय में फेल हुए हैं। कॉमर्स में फेल कुल 15,004 विद्यार्थी में से हिंदी में 5573 और अंग्रेजी में 5421 विद्यार्थी फेल हैं।

परीक्षार्थी सन्नी तिवारी अच्छा रैंक लाकर जेईई मेन क्वालीफाई कर चुका है। उसे इंटर साइंस में फिजिक्स में मात्र 2 नंबर मिले हैं। अभिषेक ने झारखण्ड इंजीनियरिंग की परीक्षा पास कर ली है, उसे फिजिक्स में 1 नंबर मिला है। रौशन कुमार दसवीं तक CBSE का छात्र रहा है, मैट्रिक परीक्षा में उसे 10 सीजीपीए मिला था, जेईई मेंस भी क्वालीफाई कर चुका है, लेकिन बिहार बोर्ड में दिए इंटर परीक्षा में उसे केमिस्ट्री में 9 और फिजिक्स में मात्र 4 नंबर नंबर मिला है। अभिषेक आनंद ने भी जेईई मेंस क्वालिफाई किया है,बिहार बोर्ड के रिजल्ट में इसे फिजिक्स में 4 नंबर मिले हैं। चंद्रदेव सिंह के पुत्र अभिषेक कुमार ने अमेटी और कलिंगा इंजीनियरिंग के साथ ही कई और परीक्षा क्वालिफाई किया है, इसे फिजिक्स में 2 और केमेस्ट्री में मात्र 7 नंबर मिले हैं।
विशाल कुमार का मामले तो और भी आश्चर्यजनक है। विशाल ने मैथेमेटिक्स की परीक्षा दी थी, जबकि उसे बायोलॉजी में 59 अंक मिले हैं, जिसकी परीक्षा ही उसने नहीं दी थी।
इस बीच एक नया खुलासा कई स्थान से हुआ है। परीक्षार्थी को उनके पंजीयन फार्म में दर्ज मोबाइल पर फोन करके पैसे मांगे गए। फोन पर उन्हें नंबर बताने के साथ ही बाकायदा उनका नाम, पिता का नाम, माता का नाम, संकाय और स्कूल/कॉलेज के नाम का जिक्र करते हुए अच्छे रिजल्ट के लिए संपर्क करते रहने को कहा गया। इस पूरे प्रकरण के पीछे कोई गिरोह हो सकता है। कुछ छात्रों ने बोर्ड के कथित स्टाफ से मोबाइल पर हुई बातचीत की रिकार्डिंग सोशल साइट पर अपलोड कर दिया है।
बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने इन सारी गडबडियों के लिए शिक्षक की कमी को जिम्मेवार ठहराते हुए कहा कि विद्यालयों में 12वीं की पढ़ाई सब्जेक्ट वाइज नहीं हो पा रही है। संघ के सचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि राज्य में 3000 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय में ढाई हजार विद्यालय बिना प्रधानाध्यापक के चल रहे हैं। इन विद्यालयों में करीब 37 हजार शिक्षक होने चाहिए थे पर करीब 12 हजार शिक्षकों के भरोसे ही चल रहे हैं। 2006 से लागू नियोजन नियमावली की गड़बड़ी के कारण करीब 25 हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं।

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