मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य सरकार द्वारा उच्च शिक्षा को प्रमोट करने के क्रम में हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पुनः दुहराते हुए कहा है कि मधुबनी, वैशाली, सीतामढ़ी, भोजपुर और बेगूसराय कुल पांच जिलों में नये मेडिकल कॉलेज खोलने का निर्णय लिया गया है और इसके लिए जमीन की खोज पूरी कर ली गयी है. मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों मुख्य सचिव से विस्तार से चर्चा करते हुए चिह्नित भूमि के हस्तांतरण के निर्देश दिये हैं.
मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत पांच जिलों में चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना के लिए करीब दो साल पहले कवायद शुरू हुई थी. उस दौरान संबंधित सभी जिलों में निर्माण के लिए करीब 800 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था. सभी जिलों में भूमि के लिए दिशा-निर्देश भी काफी पहले जारी किया गया था. सभी जिलों में भूमि उपलब्ध हो गयी है. भोजपुर में मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन का चयन ऐसी जगह पर किया गया है जिससे कि उसका लाभ भोजपुर और बक्सर दोनों जिलों को मिल पायेगा. सीतामढ़ी मेडिकल कॉलेज के लिए भी जमीन की तलाश पूरी की जा चुकी है. जबकि बेगूसराय में उद्योग विभाग की जमीन पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना होनी है. बिहार में पांच नये मेडिकल कॉलेज की स्थापना से स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बेहतर होगी. राज्य सरकार के साथ ही केंद्र सरकार ने पहले भी इस दिशा में प्रयास किये थे. गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर किये जाने की कड़ी में ही पांच जिलों में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा रही है.


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनआईटी पटना के दीक्षांत समारोह में बोलते हुए कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा को प्रमोट करने में लगी है. राज्य में इंजीनियरिंग कॉलेज काफी कम हैं. इसलिए हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने का प्रयास किया जा रहा है. बीआईटी मेसरा की ब्रांच खुलवाने के साथ ही आईआईटी पटना, ट्रिपल आईटी समेत कई अन्य संस्थानों का निर्माण यहां किया गया. एनआईटी पटना के 90% छात्रों का प्लेसमेंट हुआ है मुझे तब अत्यधिक खुशी होगी जब यह देश के टॉप एनआईटी में शामिल हो जाएगा.
मुख्यमंत्री ने गांधी जी के विचारों को आत्मसात करने का आह्वान करते हुए छात्रों से कहा कि- “गांधी जी ने कहा था कि इस धरती में इंसान की जरूरतों को पूरा करने की पूरी क्षमता है, लेकिन लालच को नहीं. विवेक के बिना ज्ञान ठीक नहीं होता. कई लोग बिना काम किये धन अर्जित करना चाहते हैं, यह ठीक नहीं है. पहले इंटर के बाद यहाँ कम संख्या में छात्र उच्च शिक्षा के लिए आगे आते थे. अब स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ उठाकर नौजवान महज 4% ब्याज पर पर 4 लाख रुपये तक लोन लेकर उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं जबकि दिव्यांग और बेटियों को महज 1% पर यह राशि दी जा रही है.
ज्ञात है कि भारत के सरकारी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार ठीक से नहीं हो पा रहा है जबकि प्राइवेट सेक्टर में स्वास्थ्य सुविधाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. मेडिकल जर्नल ‘लैंसेट’ की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016 में स्वास्थ्य सेवा के उपयोग और उसकी गुणवत्ता (हेल्थकेयर एक्सेस एंड क्वालिटी) के मामले में भारत 41.2 अंकों के साथ 145वें स्थान पर है जो कि चीन (48), श्रीलंका (71), बांग्लादेश (133) और भूटान (134) से भी पीछे है. यह रिपोर्ट ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज’ के 1990 से 2016 के बीच 195 देशों के वैश्विक स्तर पर किये गये अध्ययन पर आधारित है. इस सूचकांक में मृत्यु के उन 32 कारणों को आधार बनाया गया है, जिन्हें प्रभावी चिकित्सा देखभाल के जरिये रोका जा सकता है.

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