दिल्ली के प्रेस क्लब में शुक्रवार 9जून को देश के नामी गिरामी संपादक-पत्रकार इकट्ठा हुए और देश के जाने-माने पत्रकार प्रणय रॉय और एनडीटीवी पर CBI के छापे के खिलाफ केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर हमला बोला।
अरुण शौरी ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें केन्द्रीय मंत्रियों के कार्यक्रमों का बहिष्कार करना चाहिए, अपने कार्यक्रमों में मंत्रियों को नहीं बुलाना चाहिए। मोदी सरकार दबाव का इस्तेमाल कर रही है, अभी एनडीटीवी को उदाहरण बनाया है, आने वाले महीनों में ये दबाव बढ़ेगा। इस वक्त पत्रकारों के तीन समर्थक है, पहला हमारी एकजुटता, दूसरा कोर्ट और तीसरा हमारे पाठकों और दर्शकों का विश्वास।
इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एनडीटीवी के को-फाउंडर प्रणय रॉय ने कहा कि एनडीटीवी के ऊपर लगाये गये सारे आरोप पूरी तरह से झूठ और मनगढ़ंत है। हालांकि कानून से ऊपर कोई नहीं है, लेकिन मुझे कहना है कि हमलोग इन सारे झूठे आरोपों का सामना पारदर्शी तरीके से करेंगे, हम सिर्फ ये चाहते हैं कि इस पूरे मामले की जांच एक समय-सीमा के अंदर हो। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि सरकार के दबाव के सामने कतई ना झुकें, अगर हम एक बार झुक गये तो सत्ता हावी हो सकती है।

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि वर्तमान माहौल में चुप रहना कोई विकल्प नहीं है, यह वह समय है जब हमें इतिहास में सही किनारे पर खड़ा होना होगा।
प्रसिद्ध कानूनविद फली नरीमन ने कई उदाहरण देते हुए कहा कि फ्रीडम आफ्टर स्पीच ही सही मायने में फ्रीडम ऑफ स्पीच है। आपराधिक मामलों में कोई भी मुकदमे से बच नहीं सकता, लेकिन जिस तरह से यह किया गया, उससे मुझे लगता है कि यह प्रेस और मीडिया की आजादी पर हमला है।
बैठक में कुलदीप नैयर, अरुण शौरी, एचके दुआ, ओम थानवी, शेखर गुप्ता और डॉ. प्रणय रॉय समेत कई बड़े पत्रकारों और कानूनविद फली नरीमन ने हिस्सा लिया।

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