पंचायत चुनाव में अभी अति पिछड़ा को 20 और SC/ST को 17 प्रतिशत आरक्षण है. अगले पंचायत चुनाव तक 13% तक आरक्षण की सीमा और बढ़ाई जा सकती है. केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने 2021 में जातीय गणना कराने का निर्णय लिया है.
उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भाजपा अति पिछड़ा वर्ग मोर्चा की ओर से रवीन्द्र भवन में आयोजित ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर जयंती समारोह’ को सम्बोधित करते हुए राजद से सवाल किया कि 27 साल तक बिहार में पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराया गया? 2003 में हुए पंचायत चुनाव में SC/ST और अतिपिछड़ों को आरक्षण से वंचित क्यों किया गया? कर्पूरी ठाकुर द्वारा आर्थिक आधार पर दिए गए 3% आरक्षण को 1992 में क्यों समाप्त किया गया? अतिपिछड़ों को पिछले विस चुनाव में भाजपा ने 25 तो राजद ने मात्र 5 टिकट क्यों दिया? दस साल तक केन्द्र की सत्ता में रहने के बावजूद कर्पूरी फॉर्मूले के समान पिछड़ा वर्ग की सूची के वर्गीकरण का प्रयास क्यों नहीं किया?
श्री मोदी ने कांग्रेस से पूछा कि 45 वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद पिछड़े वर्गों के लिए आयोग का गठन क्यों नहीं किया? मंडल व मुंगेरीलाल कमीशन की रिपोर्ट लागू क्यों नहीं किया? पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा क्यों नहीं दिया? पिछड़ा/अतिपिछड़ों की सूची का वर्गीकरण क्यों नहीं किया? 1931 के बाद जाति गणना क्यों नहीं करायी गयी? गरीब सवर्णों को आरक्षण क्यों नहीं दिया? 2015 के बिहार विस चुनाव में एक भी अति पिछड़ा को टिकट क्यों नहीं दिया?
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत चुनाव में अभी अति पिछड़ा को 20 और SC/ST को 17 प्रतिशत आरक्षण है, अगले पंचायत चुनाव तक आरक्षण की सीमा 13% और बढ़ाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि 1931 में पहली जातीय गणना के 83 वर्षों बाद केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने 2021 में जातीय गणना कराने का निर्णय लिया है. केंद्र सरकार ने पिछड़े वर्गों के आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के साथ ही केन्द्रीय सेवाओं में आरक्षण के लिए कर्पूरी फार्मूला के तर्ज पर सूची वर्गीकरण के लिए रोहिणी कमीशन का गठन और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम में संशोधन किया. बिहार में जब NDA की सरकारी बनी तो अति पिछड़ों को पंचायत चुनाव में 20 प्रतिशत आरक्षण के साथ ही आउटसोर्सिंग में भी आरक्षण का प्रावधान लागू किया गया. 1978 में जब जनसंघ सरकार में था तो अतिपिछड़ों को आरक्षण दिया गया. मंडल कमीशन की रिपोर्ट को कांग्रेस ने दस वर्षों तक लागू नहीं किया, 1989 में जब भाजपा के सहयोग से वी पी सिंह की सरकार बनी तो पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया.



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