बिहार के नवादा जिला मुख्यालय से सटे अकबरपुर प्रखंड के राजादेवर गांव से पालकालीन भगवान बुद्ध की ऐतिहासिक प्रतिमा मिली है। प्रतिमा में भगवान बुद्ध के एक नहीं बल्कि 70 छोटी-छोटी प्रतिमाएं हैं। सभी प्रतिमाएं पद्मासन स्थिति में दिख रही हैं।

राजादेवर के अनिल महतो के खेत में धान की खेत में चौकी के दौरान काले रंग का बड़ा सा पत्थर दिखा। जिसे अनिल ने खेत से निकालकर साफ पानी से धोया, तब पता चला कि काले रंग का पत्थर सही मायनों में भगवान बुद्ध की प्रतिमा है। गांव वालों के अनुसार इसके पहले कभी इस तरह की कोई प्रतिमा गांव के आसपास नहीं मिली है।

भगवान बुद्ध को अलौकिक ज्ञान की प्राप्ति पीपल वृक्ष के नीचे हुई थी। शायद इसी बात को ध्यान में रखकर गांव वालों ने खेत से मिले भगवान बुद्ध को समीप के ही एक पीपल के वृक्ष के नीचे जगह दी है। प्रतिमा को देखने को लेकर गांव वालों में जबर्दस्त उत्सुकता है। आसपास के गांव वाले भी इसे देखने के लिए पहुंच रहे हैं।

नवादा में नारद संग्रहालय के सेवानिवृत्त क्यूरेटर अवध किशोर प्रसाद सिंह ने बताया कि ऐसी प्रतिमाएं पाल-काल में बनती थीं। लोग अपनी किसी मन्नत पूरी होने पर एक साथ कई प्रतिमाओं का निर्माण बड़े से पत्थर में करवाते थे। क्यूरेटर बताते हैं कि कई श्रद्धालु एक साथ सौ अथवा हजार प्रतिमाएं भी बनवाते थे। उन्होंने कहा कि 10वीं से 12वीं सदी के बीच में इस तरह की प्रतिमाएं बनायी जाती थीं।

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