न्याय व्यवस्था के शीर्ष पदों पर पुरुषों के अब तक रहे बोलबाले की स्थिति में पहली बार बदलाव नजर आ रहा है जब देश के चार महानगरों मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई स्थित देश के बड़े और सबसे पुराने हाईकोर्ट की प्रमुख महिला जज हैं।
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने इन चारों महिला चीफ जस्टिस की तस्वीर ट्वीट कर उन्हें बधाई देते हुए लिखा कि यह देश की महिलाओं के लिए सम्मान की बात है। यह इतिहास 31 मार्च को इंदिरा बनर्जी के मद्रास हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस नियुक्त किए जाने के बाद बना है।




मद्रास हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी को मिलाकर कुल छह महिला जज और 53 पुरुष जज हैं। जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में पढ़ाई की है। वह 2002 में कलकत्ता हाईकोर्ट की जज बनी थीं। 2016 में दिल्ली आ गईं। बुधवार 5 अप्रैल को उन्हें मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की शपथ दिलाई गई।
बॉम्बे हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस मंजुला चेल्लूर हैं, चेल्लूर बेल्लारी की पहली महिला वकील थीं। जो 26 सितंबर 2012 में कर्नाटक हाईकोर्ट की पहली महिला जज बनीं। 2014 में कलकत्ता हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस बनीं। उन्हें पिछले साल 22 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट में नंबर दो की स्थिति में भी महिला जज हैं और सबसे ज्यादा 11 महिला जज भी वहीं हैं, यहां 61 पुरुष जज हैं।




दिल्ली हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस जीएस रोहिणी कार्यरत हैं। रोहिणी लीगल रिपोर्टर रहीं हैं, बाद में वकालत की और आंध्र हाईकोर्ट में एडिशनल जज बनीं। 21 अप्रैल 2016 को दिल्ली हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस बनीं। दिल्ली में 9 महिला जज हैं और 35 पुरुष जज हैं। यहां भी नंबर दो की स्थिति में एक महिला जज ही हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट की कमान चीफ जस्टिस निशिता निर्मल म्हात्रे के हाथ है। म्हात्रे माइक्रो बॉयोलॉजी में ग्रेजुएट हैं, एलएलबी की डिग्री बाद में ली। 2012 में कलकत्ता हाईकोर्ट में जज बनीं। वह 2016 में एक्टिंग चीफ जस्टिस बनीं, 1 दिसंबर से इस पद पर हैं। यहां 35 पुरुष जजों के मुकाबले 4 महिला जज हैं।
हाँलाकि आज भी 24 में से 8 हाईकोर्ट ऐसे हैं जहां एक भी महिला जज नहीं हैं। देश के 24 हाईकोर्ट में करीब 632 जजों में लगभग 10.7 फीसदी, सिर्फ 68 जज ही महिलाए हैं। सुप्रीम कोर्ट में 28 जजों में सिर्फ एक जस्टिस आर. भानुमती महिला जज हैं। सुप्रीम कोर्ट 1950 में बना पर 1980 तक एक भी महिला जज नहीं थी। तब से आज तक सिर्फ छह महिला जज हुई हैं और सिर्फ दो बार एक साथ दो महिला जज हुई हैं।



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