दुनियाभर के 100 से भी ज्‍यादा देशों में हुए अब तक के सबसे बड़े साइबर हमले से इंटरनेट की दुनिया में तबाही मचाने वाले कंप्यूटर वायरस रैनसमवेयर पर एक 22 साल के शख्स ने काबू पा लिया है। एक छोटे से आइडिया से उन्होने इस खतरनाक वायरस पर काबू पाया है।
इस बात की पुष्टी ब्रिटेन के एक सिक्योरिटी रिसर्चर ने की, उनका कहना है कि वह संयोग से मलिसस रैनसमवेयर को फैलने से रोकने में कामयाब रहे। ब्रिटेन के रिसर्चर ने नोटिस किया कि मलवेयर एक स्पेशल वेब ऐड्रेस से लगातार कनेक्ट होने की कोशिश कर रहा है जिससे नए कंप्यूटर समस्याग्रस्त हो जाते हैं। लेकिन वेब ऐड्रेस के जुड़ने की कोशिश के दौरान अक्षरों में घालमेल था और ये रजिस्टर्ड नहीं थे।
मलवेयर टेक ने इसे रजिस्टर करने का फैसला किया और उसे 10.69 डॉलर में खरीद लिया। इसे खरीदने के बाद उन्होंने देखा कि और किन कंप्यूटरों तक उसकी पहुंच बन रही है। इसी मलवेयर टेक को आइडिया मिला कि रैनसमवेयर कैसे फैल रहा था। इस मामले में उन्हें अप्रत्याशित रूप से रैनसमवेयर को रोकने में सफलता मिली।
इस तरह के कोड को एक ‘किल स्विच’ के रूप में जाना जाता है। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगती है तो कुछ हमलावर सॉफ्टवेयर तक फैलने से रोकने में इसका इस्तेमाल करते हैं। मलवेयर टेक ने अपनी खोज का परीक्षण किया और रैनसमवेयर को रोकने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि रात में जांच के दौरान उनकी पलकें तक नहीं झपकीं। हालांकि उनकी तहकीकात से रैनसमवेयर के कारण जो नुकसान हुआ था उसकी भारपाई नहीं हो पाई, लेकिन नए कंप्यूटरों में फैलने से यह रुक गया। ऐसे में वह इस मामले में संयोगवश हीरो की तरह सामने आ गए।
हमले को रोकनेवाला 22 साल का ये शख्स “मलवेयरटेक” उपनाम से जाना जाता है। उन्होंने एक हफ्ते की छुट्टी ली थी, लेकिन वैश्विक साइबर हमले के बाद उन्होंने रैनसमवेयर की जांच करने का फैसला किया। मलवेयरटेक ने चेतावनी दी है कि इसे , रोक दिया गया लेकिन दूसरा फिर से आएगा और हम उसे नहीं रोक पाएंगे। इसमें काफी पैसा है और इसे रोकने की कोई वजह नहीं है, क्योंकि इसके कोड बदलने की पर्याप्त कोशिश नहीं की गई है। सिक्योरिटी विशेषज्ञों ने भी इसी प्रकार की चेतावनी दी है।
रैनसमवेयर एक कंप्यूटर वायरस है जो कंप्यूटर्स फ़ाइल को बर्बाद करने की धमकी देता है। धमकी दी जाती है कि अगर अपनी फाइलों को बचाना है तो फीस चुकानी होगी। ये वायरस कंप्यूटर में मौजूद फ़ाइलों और वीडियो को इनक्रिप्ट कर देता है और उन्हें फिरौती देने के बाद ही डिक्रिप्ट किया जा सकता है। खास बात ये है कि इसमें फिरौती चुकाने के लिए समयसीमा निर्धारित की जाती है और अगर समय पर पैसा नहीं चुकाया जाता है तो फिरौती की रकम बढ़ जाती है। ताज़ा अपडेट पाने के लिए हमारे पेज को लाइक करें

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