तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) से जुड़ा नया विधेयक पांच घंटे चर्चा के बाद लोकसभा में पारित हो गया. विधेयक पर मतदान के समय कांग्रेस, अन्नाद्रमुक, द्रमुक और समाजवादी पार्टी के सांसदों ने वॉकआउट किया.
चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जब पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत 22 इस्लामिक देशों ने तीन तलाक को गैर-कानूनी करार दिया है तो भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में तीन तलाक को अपराध मानने में क्या परेशानी है? महिला सशक्तिकरण के लिए यह बिल जरूरी है. सुबह बिल को लोकसभा में चर्चा के लिए रखते हुए कानून मंत्री ने कहा था कि देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने भी तीन तलाक को असंवैधानिक बताया है.
चर्चा के दौरान कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि तीन तलाक से जुड़ा बिल महत्वपूर्ण है, इसका गहन अध्ययन करने की जरूरत है, यह संवैधानिक मसला है. मैं अनुरोध करता हूँ कि इस बिल को ज्वाइंट सिलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया जाए. बिल में संशोधन हेतु सदस्यों के प्रस्ताव ज्वाइंट सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाता है और कमेटी में कौन सदस्य होगा, इसका फैसला सदन करता है.
रविशंकर प्रसाद ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि FIR का दुरुपयोग न हो, समझाैते का माध्यम हो और जमानत का प्रावधान हो, विपक्ष की मांग पर ये सभी बदलाव बिल में किए जा चुके हैं. यह बिल किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है. जब यह संसद बच्चियों से दुष्कर्म करने वालों के लिए फांसी की सजा पर मुहर लगा चुकी है तो यही संसद तीन तलाक को खत्म करने की आवाज क्यों नहीं उठा सकती? दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा जैसे कानूनों में भी सजा का प्रावधान है. उस पर इस सदन ने विरोध नहीं किया फिर तीन तलाक के मामले में विरोध क्यों हो रहा है? इसके पूर्व चर्चा के लिए इसे सदन में रखते हुए कहा था कि तीन तलाक विधेयक मुस्लिम महिलाओं के लिए बेहद खास है, इसलिए इसे सियासत के तराजू में न तोला जाए. ट्रिपल तलाक के दुरूपयोग को खत्म किया जाना चाहिए. ये मुस्लिम महिलाओं की गरिमा से जुड़ा हुआ मामला है. केंद्र सरकार तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के प्रतिबद्ध है.
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने चर्चा के दौरान कहा कि तीन तलाक के मामलों में पति को जेल भेजने पर मुस्लिम महिलाओं को क्या मुआवजा मिलेगा? हिंदू महिलाओं से जुड़े मसलों पर चर्चा क्यों नहीं होती? क्या सरकार हिंदू महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून लाएगी? कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने कहा कि यह बिल महिला सशक्तिकरण के लिए नहीं, बल्कि मुस्लिम पुरुषों को दोषी करार देने के लिए है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने 300 पेज के जजमेंट में ये कहीं नहीं लिखा कि तीन तलाक पर कानून बनना चाहिए और इसमें सजा का प्रावधान होना चाहिए. सरकार गलत तरीके से यह विधेयक लाई और इसके बहाने वोट बैंक की राजनीति कर रही है.
AIMIM के असदउद्दीन ओवैसी ने कहा कि मैं इस बिल की मुखालफत करता हूँ क्योंकि जब तीन तलाक के मामलों में पति जेल चला जाएगा तो महिला को छत और खाना कौन देगा, सरकार देगी? इस मांग का समर्थन करते हुए TMC के वरिष्ठ नेता सुदीप बंधोपाध्याय ने भी लोकसभा में कहा कि यह बिल ज्वाइंट सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाना चाहिए. सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने 3 साल की सजा के प्रावधान का विरोध किया.


केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कुछ लोगों ने फतवा जारी करने की दुकानें खोल ली हैं. यह देश संविधान से चलता है, शरीयत से नहीं. तीन तलाक सामाजिक कुरीति है. इसी तरह से सती प्रथा और बाल विवाह को भी खत्म किया गया था. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद 400 से ज्यादा महिलाएं तीन तलाक से प्रभावित हुई हैं, यह बड़ा आंकड़ा है. अगर एक महिला भी प्रभावित हो रही है तो इस सदन में बैठे हर व्यक्ति को इससे विचलित होना चाहिए. भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि फोन पर मैसेज भेजकर, फोन करके या अन्य तरीके से तीन बार तलाक कहकर किसी महिला के जीवन को बर्बाद करने की छूट को समाप्त किया जाना चाहिए. कांग्रेस अगर चाहती तो यह बिल तीस साल पहले पास करा सकती थी. लेकिन, उसने बंटवारे की राजनीति को प्राथमिकता दी.
इसपर चर्चा से पहले विपक्ष ने राफेल सौदे को लेकर सदन में जमकर हंगामा मचाया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे और बाद में 2 बजे तक के लिए स्‍थगित कर दी गयी. हाँलाकि पिछले सप्ताह सदन में इस पर सहमति बनी थी कि 27 दिसंबर को विधेयक पर चर्चा होगी और कांग्रेस ने भी ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2018’ पर होने वाली चर्चा में भाग लेने पर सहमति जताई थी. खड़गे ने तब कहा था कि हम चर्चा में भाग लेंगे और अपने विचार रखेंगे. साथ ही हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह धार्मिक मुद्दों पर हस्‍तक्षेप न करें.
पिछले हफ्ते लोकसभा में जब यह चर्चा के लिए आया था तो कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन को सुझाव दिया था कि इस पर अगले हफ्ते चर्चा कराई जाए. तब संसदीय कार्य मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने विपक्ष से आश्वासन मांगा कि उस दिन बिना किसी बाधा के चर्चा होने दी जाएगी. इस पर खड़गे ने कहा कि, ‘मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस विधेयक पर 27 दिसंबर को चर्चा कराइए, हम सभी इसमें हिस्सा लेंगे. हमारी पार्टी और अन्य पार्टियां भी चर्चा के लिए तैयार हैं.
खड़गे के इस बयान पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि खड़गे जी ने सार्वजनिक वादा किया है और हमें 27 दिसंबर को चर्चा कराने में कोई समस्या नहीं है. मैं अनुरोध करता हूं कि चर्चा खुशनुमा और शांतिपूर्ण माहौल में हो. यह विधेयक 17 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया गया था. एक बार में तीन तलाक देना गैरकानूनी और अमान्य होने के साथ ही इसके लिए तीन साल तक की सजा भी हो सकती है. राजनीतिक दलों में विधेयक को लेकर स्वीकार्यकता बढ़ाने के लिए सरकार ने जमानत के प्रावधान सहित कुछ संशोधनों को मंजूरी भी प्रदान की थी.
अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) की 1400 साल पुरानी प्रथा को असंवैधानिक करार देते हुए सरकार से इसपर कानून बनाने को कहा था. सरकार ने दिसंबर 2017 में लोकसभा से इस संदर्भ में विधेयक पारित कराया लेकिन राज्यसभा में सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं रहने के कारण यह बिल अटक गया. विपक्ष ने तीन तलाक के आरोपी के लिए जमानत के प्रावधान मांग की थी.



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