राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने एक पर्यावरण कार्यकर्ता की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। साथ ही पर्यावरण की मद्देनजर से संवेदनशील ताज के आसपास खुले में नगरपालिका के ठोस कचरे को नहीं जलाने का निर्देश दिया है।

एक पर्यावरण कार्यकर्ता द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण में आरोप लगाया है कि आगरा में बड़े पैमाने पर नगरपालिका के ठोस कचरे को जलाए जाने से ताजमहल का रंग पीला पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने प्रशासन की अनदेखी पर भी सवाल उठाया है।

जस्टिस स्वतंतर कुमार की अध्यक्षता वाली हरित अधिकरण की पीठ ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत अन्य को नोटिस जारी करते हुए उनसे दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

एनजीटी का यह आदेश आगरा के रहने वाले पर्यावरण कार्यकर्ता डीके जोशी की याचिका पर आया है। याचिका में उन्होंने आईआईटी-कानपुर, जॉर्जिया प्रौद्योगिकी संस्थान और विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय के संयुक्त अध्ययन का हवाला दिया है। इस अध्ययन के अनुसार धूल के साथ भूरे और काले कार्बन के कारण 17वीं शताब्दी का सफेद संगमरमर से बला ताजमहल पीला पड़ रहा है।

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