इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने आखिरी फैसला आने तक जाधव को फांसी पर रोक लगाने के साथ ही पाकिस्तान से कहा कि वियना कन्वेंशन के तहत जाधव को कॉन्स्यूलर एक्सेस देना होगा।
पाक के खिलाफ भारत को 18 साल बाद 18 मई को फिर जीत मिली जब ICJ ने पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर रोक लगाते हुए कहा कि हमारा आखिरी फैसला आने तक जाधव को फांसी नहीं दी जा सकती। साथ ही ICJ ने पाक से कहा कि वियना कन्वेंशन के तहत जाधव को कॉन्स्यूलर एक्सेस भी देना ही होगा।
पाक ने जाधव को पिछले साल गिरफ्तार किया, जासूस बताते हुए मिलिट्री कोर्ट ने पिछले महीने उसे फांसी की सजा सुनाई। भारत ने इंटरनेशनल कोर्ट में इसके खिलाफ अपील कियाथाl 18 साल पहले भी भारत को तब जीत मिली थी, जब 1999 में एक मामले में कोर्ट ने पाक के दावे को खारिज कर दिया था।
भारतीय समयानुसार ICJ ने दोपहर 3.30 बजे फैसला सुनाया, इस दौरान चीफ जस्टिस रोनी अब्राहम और बाकी दसों जज भी मौजूद थे। चीफ जस्टिस ने दोनों देशों की तरफ से पेश की गईं दलीलों की समरी सुनाने के बाद ICJ का ऑर्डर ऑफ मैरिट (वो बातें जिन पर फौरन अमल किया जाना है।) पढ़कर सुनाया। अब्राहम ने कहा कि भारत और पाक दोनों वियना कन्वेंशन का हिस्सा हैं। उन्हें जिम्मेदार देश की तरह बर्ताव करना होगा। पाकिस्तान जाधव पर भारत को कॉन्स्यूलर एक्सेस दे और जब तक ये कोर्ट आखिरी फैसला नहीं सुना देता तब तक मिलिट्री कोर्ट द्वारा दी गई फांसी की सजा पर अमल नहीं किया जा सकता। जाधव को मर्सी पिटीशन दायर करने का हक है। सिविलाइज्ड सोसायटी में पहले से तय नतीजे पर सजा देने का अधिकार नहीं है।
इस फैसले में एक बात बेहद अहम है। कोर्ट ने पाकिस्तान से साफ कहा है कि उसे कोर्ट को सबूतों के साथ बताना होगा कि उसे जो ऑर्डर ICJ ने दिए हैं, उन पर किस तरह अमल किया गया। फैसला सुनाते वक्त हरीश साल्वे मौजूद नहीं थे, तब भारतीय टीम को विदेश विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी दीपक मित्तल लीड कर रहे थे। मंगलवार को इस मामले में भारत की तरफ से साल्वे ने दलीलें रखी थीं।
अपने फैसले में ICJ ने जिक्र किया कि जाधव को 3 मार्च 2016 को गिरफ्तार किया गया था। जानकारी 25 मार्च को दी गई। भारत ने कई बार कॉन्स्यूलर एक्सेस मांगा। 4 अप्रैल 2017 को पाकिस्तान के फॉरेन ऑफिस ने प्रेस रिलीज में बताया कि जाधव को मिलिट्री कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। भारत ने विरोध किया। जाधव को पाकिस्तानी कानून के मुताबिक, 40 दिन में सजा के खिलाफ अपील करनी थी, लेकिन ये हुआ या नहीं? कोर्ट को इसकी जानकारी नहीं है। जाधव की गिरफ्तारी को लेकर डिस्प्यूट हैं। इसे ध्यान में रखना होगा। भारत और पाकिस्तान दोनों वियना कन्वेंशन का हिस्सा हैं। पाकिस्तान के ऑब्जेक्शंस पुख्ता नहीं हैं, लिहाजा इन पर विचार नहीं किया जा सकता, लेकिन ये भी ध्यान रखना होगा कि इस मामले में दोनों देशों के बीच म्युचुअल ट्रीटी (आपसी समझौता) है और इसे 2008 में रिव्यू भी किया जा चुका है। वियना कन्वेंशन के मुताबिक ये जरूरी है कि सभी सदस्य देश एक-दूसरे के नागरिकों को हर हाल में कॉन्स्यूलर एक्सेस मुहैया कराएं। भारत को ये अधिकार है कि वो कॉन्स्यूलर एक्सेस के लिए अपील करे। कोर्ट का आखिरी फैसला आने तक पाकिस्तान जाधव को सजा नहीं दे सकता।
जाधव को दया याचिका दायर करने का हक है और सिविलाइज्ड सोसायटी में हर देश को पहले से तय नतीजे पर सजा देने का अधिकार नहीं है। पाकिस्तान कोर्ट को ये बताए कि उसने कोर्ट के दिए ऑर्डर पर क्या एक्शन लिए। इस केस की मैरिट के आधार पर सुनवाई होगी।
अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि इस फैसले ने ये दिखा दिया कि पाकिस्तान की दलीलें गलत थीं। प्रॉपर ट्रायल और मिलिट्री ट्रायल बोगस था। सारा भारत और जाधव की फैमिली इत्मिनान से रह सकती है, वो सेफ हैं।
दस अगस्त 1999 को इंडियन एयरफोर्स ने गुजरात के कच्छ में पाकिस्तान नेवी के एक एयरक्राफ्ट एटलांटिक को मार गिराया था। इसमें सवार सभी 16 सैनिकों की मौत हो गई थी। पाकिस्तान का दावा था कि एयरक्राफ्ट को उसके एयरस्पेस में मार गिराया गया। उसने इस मामले में भारत से 6 करोड़ डाॅलर मुआवजा मांगा था। ICJ की 16 जजों की बेंच ने 21 जून 2000 को 14-2 से पाकिस्तान के दावे को खारिज कर दिया था।

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