राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा को भंग कर दिया. इससे पहले पीएडीपी की महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कांफ्रेस और कांग्रेस की मदद से सरकार बनाने तथा उसके बाद सज्जाद लोन ने भाजपा और 18 अन्य विधायकों की मदद से सरकार बनाने का दावा पेश राज्यपाल के समक्ष पेश किया था.
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस की मदद से जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की संभावनाओं के मद्देनजर 56 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए राज्यपाल को चिट्ठी भेजी तो उसके कुछ ही मिनटों बाद पीपुल्‍स कांग्रेस के सज्जाद लोन ने भाजपा और 18 अन्य विधायकों के समर्थन का दावा पेश कर दिया. दो दलों द्वारा सरकार बनाने के दावे के साथ ही जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बड़ी उथल-पुथल का बीजारोपड हो गया और इसके कुछ ही देर बाद राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग कर दी.
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा ने राज्यपाल को भेजे पत्र में लिखा कि- “आप जानते हैं कि पीडीपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी है, हमारे 29 विधायक हैं. आपको मीडिया के जरिए पता लगा होगा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस भी सरकार बनाने में हमारा समर्थन करने की इच्छा रखती हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस के 15 और कांग्रेस के 12 विधायक, सभी मिलकर हमारी संख्या 56 हो जाती है. मैं अभी श्रीनगर में हूँ और मेरे लिए आपसे अभी मुलाकात संभव नहीं है. इस पत्र के जरिए हम आपको ये सूचित कर रहे हैं कि हम सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए जल्द ही आपसे मिलना चाहते हैं.”


पीपुल्‍स कांग्रेस के नेता सज्जाद लोन ने राज्यपाल के निजी सचिव जीवन लाल को वॉट्सऐप पर भेजे पत्र में दावा किया कि- “भाजपा के सभी विधायकों का समर्थन हमें हासिल है, इसके अलावा 18 से ज्यादा अन्य विधायक भी हमें सपोर्ट कर रहे हैं. ये संख्या बहुमत से ज्यादा है, मैं भाजपा और दूसरे सदस्यों के समर्थन के पत्र पेश कर रहा हूँ. हम भरोसा दिलाते हैं कि राज्य में शांति स्थापित करने के लिए मजबूत और टिकाऊ सरकार बनाएंगे.” इस पत्र को सज्जाद ने ट्विटर पर भी शेयर किया.
जम्मू-कश्मीर में मार्च 2015 में पीडीपी और भाजपा ने मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनाई थी. उनके निधन के बाद महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनीं. गठबंधन की यह सरकार इसी वर्ष जून तक चली, अभी वहां राज्यपाल शासन लागू है. 19 दिसंबर को राज्यपाल शासन के छह महीने पूरे होंगे, जिसके बाद वहाँ राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है और उसके लिए विधानसभा भंग करनी होगी.
87 सदस्‍यीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीडीपी के 28, भाजपा के 25, विधायक, नेशनल कांफ्रेंस के 15 कांग्रेस के 12, पीपुल्‍स कांग्रेस के 2 तथा अन्य 5 विधायक हैं. सदन में बहुमत का आंकड़ा पाने के लिए 44 विधायकों के समर्थन की दरकार है.

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