जम्मू-कश्मीर के कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री और PDP नेता महबूबा मुफ्ती सड़क पर उतरीं और श्रीनगर में केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.
महबूबा ने इससे पहले ट्वीट किया- ‘लोकतंत्र विचारों का संघर्ष होता है, ऐसे में जमात-ए-इस्लामी (JK) पर पाबंदी लगाने की दमनात्मक कार्रवाई निंदनीय है और यह जम्मू कश्मीर के राजनीतिक मुद्दे से अक्खड़ और धौंस से निपटने की भारत सरकार की पहल का एक अन्य उदाहरण है.’
उन्होंने कहा कि जमात-ए-इस्लामी से भारत की सरकार इतनी असुविधाजनक नहीं है. कश्मीरियों के लिए अथक परिश्रम करने वाले एक संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. क्या अब BJP विरोधी राष्ट्र विरोधी हो रहा है?’
केंद्र सरकार ने दो दिन पूर्व आतंकवाद निरोधक कानून के तहत जमात-ए-इस्लामी (JK) पर पांच साल के लिए पाबंदी लगाई थी. उसका आधार यह था कि संगठन की आतंकवादी संगठनों के साथ साठगांठ है और राज्य में अलगाववादी आंदोलन बहुत तेज होने की आशंका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर उच्चस्तरीय बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत इस संगठन पर पाबंदी लगाते हुए अधिसूचना जारी की थी.
जमात-ए-इस्लामी एक इस्लामिक राजनीतिक पार्टी है, जिसकी स्थापना 1941 में इस्लामी विचारक मौलाना अबुल आला मौदूदी ने खुदा की सल्तनत स्थापित करने के मकसद से की थी. उन्होंने इस्लाम को धार्मिक मार्ग से परे एक राजनीतिक विचारधारा प्रदान करने वाले रास्ते के रूप में देखा था. जमात-ए-इस्लामी के तीन धड़े हैं- जमात-ए-इस्लामी हिंद, जमात-ए-इस्लामी-पाकिस्तान और जमात-ए-इस्लामी कश्मीर. जमात-ए-इस्लामी हिंद को छोड़कर अन्य दोनों धड़े आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे हैं.

इसके साथ ही हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों को कश्मीर घाटी में बड़े स्तर पर फंडिंग करने वाले जमात-ए-इस्लामी पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू हो गई है, उसके कई नेताओं को हिरासत में लिया गया है. साथ ही जम्मू- कश्मीर में उसकी जुटाई गई 52 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की संपत्‍त‍ि प्रॉपर्टी और एसेट्स प्रोविजन के तहत सील करने के लिए 70 से ज्‍यादा परिसरों की पहचान भी की गई है. जिसमें कई शैक्षणिक संस्‍थाएं, दफ्तर, स्‍कूल भी शामिल हैं.
इससे पहले भी दो बार जमात-ए-इस्लामी संगठन की गतिविधियों के कारण इसे प्रतिबंधित किया जा चुका है. पहली बार राज्य सरकार ने 1975 में दो साल के लिए प्रतिबंधित किया था और दूसरी बार केंद्र सरकार ने 1990 से दिसंबर1993 तक इसे प्रतिबंधित किया था. गृह मंत्रालय के अनुसार जमात-ए-इस्लामी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों को कश्मीर घाटी में बड़े स्तर पर फंडिंग करता था. माना जा रहा है कि इसके बाद अगला नंबर हुर्रियत का हो सकता है.
दरअसल जमात-ए-इस्लामी जम्मू कश्मीर का मिलिटेंट विंग है. यह जम्मू कश्मीर में अलगाववादी विचारधारा और आतंकवादी मानसिकता के प्रसार के लिए प्रमुख जिम्मेदार संगठन है. आतंककी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन को जमात-ए-इस्लामी जम्मू कश्मीर ने ही खड़ा किया है. पाकिस्तान का संरक्षण से फल-फूल रहे हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों को ट्रेंड करना, फंडिंग करना, शरण देने समेत आने-जाने की सुविधा मुहैया कराना जैसे काम जमात-ए-इस्लामी संगठन कर रहा था.
ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस एक अलगाववादी और उग्रवादी विचारधाराओं के संगठन का गठबंधन है. जो पाक प्रायोजित हिंसक आतंकवाद को वैचारिक समर्थन प्रदान करता है. उसकी स्थापना के पीछे भी जमात-ए-इस्लामी का बड़ा हाथ रहा है. इस संगठन को जमात-ए-इस्लामी जम्मू- कश्मीरने पाकिस्तान के समर्थन से स्थापित किया है.


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