कोल घोटाला मामले में आरोपित और अपने ही विभाग के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा के खिलाफ सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एमएल शर्मा की कमेटी ने जांच में प्रथम द्रष्टया पाया कि पूर्व निदेशक सिन्हा ने कोल खदान आवंटन मामले की जांच प्रभावित करने की कोशिश की थी. सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने रंजीत सिन्हा के खिलाफ जांच का जिम्मा सीबीआई के स्पेशल निदेशक एमएल शर्मा को सौंपा था.
आईपीएस (1974 बैच) अधिकारी रंजीत सिन्हा वर्ष 2012 से 2014 तक सीबीआई के निदेशक थे. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कोयला घोटाले के आरोपितों से अपने सरकारी बंगले पर मुलाकात की थी. शर्मा कमेटी ने जांच में पाया था कि प्रथमद्रष्टया लगता है कि रंजीत सिन्हा ने कोयला खदान आवंटन मामलों की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी. कमेटी ने रंजीत सिन्हा के सरकारी आवास की विजिटर्स डायरी को सही करार दिया था, विजिटर्स डायरी प्रशांत भूषण ने मामले के सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को उपलब्ध करायी थी.
सीबीआई के इतिहास में ऐसा दूसरी बार हुआ है, जब पूर्व निदेशक पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया हो और उन्ही का विभाग उनके खिलाफ जांच की कार्रवाई कर रहा हो. फरवरी, 2017 में ही सीबीआई ने पूर्व निदेशक एपी सिंह के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की थी. उन पर आरोप था कि उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मीट कारोबारी मोईन कुरैशी का पक्ष लिया.

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