सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा कि सैनिकों को कश्मीर के ‘डर्टी वॉर’ से निपटने के लिए नए-नए तरीके खोजने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब लोग हमपर पत्थर और पेट्रोल बम फेंक रहे हों, तो मैं अपने लोगों से ‘देखते रहने और मरने’ के लिए नहीं कह सकता।घाटी में पत्थरबाजों से निपटने के लिए आर्मी जीप पर कश्मीरी शख्स को बांधे जाने की घटना का बचाव करते हुए सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि मैं खुश होता अगर प्रदर्शनकारी पत्थर फेंकने के बजाए हथियारों से फायर कर रहे होते। रावत के अनुसार कश्मीर मुद्दे के ठोस हल की जरूरत है और हर किसी को इसमें शामिल होना होगा।
जीप पर स्थानीय शख्स को बांधने वाले मेजर लीतुल गोगोई को सम्मानित किए जाने पर अलगाववादी नेताओं और कुछ राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। केंद्र सरकार इस मुद्दे पर सेना के साथ है। गोगोई ने भी मीडिया के सामने आकर पूरी घटना की जानकारी देते हुए कहा था कि उनका यह कदम स्थानीय लोगों की जान बचाने के लिए उठाया गया था। बेहद हिंसक हो चुकी भीड़ पर अगर वे फायरिंग करवाते तो कम से कम 12 लोगों की जान जाती। लेकिन इसके बावजूद मामले पर राजनीति शुरू हो गई थी।

पिछले महीने सोशल मीडिया पर स्थानीय कश्मीरियों द्वारा चुनावी ड्यूटी में लगे CRPF के जवानों की पिटाई के विडियो के बाद एक और विडियो वायरल हुआ गया था, जिसमें सेना एक कश्मीरी को जीप से बांधकर ले जाती हुई दिख रही थी। कश्मीरी के सीने पर चिपके कागज पर लिखा था- मैं पत्थरबाज हूं। साथ ही सेना लाउडस्पीकर से यह चेतावनी दे रही थी कि पत्थरबाजों का यही अंजाम होगा। यह विडियो श्रीनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान 9 अप्रैल को शूट किया गया था। उमर अब्दुल्ला ने भी यह विडियो ट्वीट करते हुए इस मामले में ऐक्शन लेने की मांग की थी।

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