पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ पार्टी (PTI) ने आरोप लगाया कि PM नवाज शरीफ ने कश्मीर में जिहाद को प्रमोट करने के लिए ओसामा बिन लादेन से पैसे लिए। अपोजिशन लीडर इमरान खान की पार्टी PTI ने इस के लिए नवाज से इस्तीफा देने की मांग की है। पार्टी के स्पोक्सपर्सन फवाद चौधरी ने कहा कि इस मामले में हम सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर कर नवाज के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग करेंगे।
चौधरी ने कहा कि हम SC से कहेंगे कि पाकिस्तान के लोकतंत्र को अस्थिर करने और साजिश रचने के लिए विदेशी लोगों से पैसा लेने वाले नवाज के खिलाफ केस दर्ज किया जाए। साथ ही चौधरी ने कहा कि पहले भी शरीफ का नाम चुनी गई सरकारों के खिलाफ साजिश रचने में सामने आ चुका है, उन्होंने साजिश में अहम किरदार निभाया था।
पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ पार्टी ने शरीफ के खिलाफ एक और पिटीशन फाइल करने का एलान किया। जिसमें PTI सुप्रीम कोर्ट से 2012 के असगर खान केस पर दिए गए फैसले को लागू करने की अपील करेगी। जिसमें कहा गया था कि 1990 के जनरल इलेक्शन में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को जीत से रोकने के लिए नवाज और दूसरे पॉलिटिकल लीडर्स को पैसे दिए गए थे। PTI ने कहा कि वो इसी हफ्ते नवाज के खिलाफ दो केस फाइल करेगी।
बताया जाता है कि नवाज के खिलाफ केस करने के लिए PTI के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं। पार्टी एक किताब में छपे इंटरव्यू और कुछ हिस्सों के आधार पर आरोप लगा रही है। इस किताब में लिखी बातों पर भरोसा करते हुए PTI 1980 के दशक के पॉलिटिकल हिस्ट्री को नवाज के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहती है।
‘खालिद ख्वाजा: शहीद-ए-अमन’ नाम की किताब ही PTI के आरोपों की अहम कड़ी है। ये किताब शामामा खालिद ने लिखी है, जिनके पति खालिद ख्वाजा ISI के पूर्व जासूस थे। खालिद का 2010 में पाकिस्तानी तालिबान ने मर्डर कर दिया था। किताब में लिखे एक इंटरव्यू में कहा गया है कि नवाज शरीफ ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान में जिहाद को प्रमोट करने के लिए पूर्व अल कायदा चीफ लादेन से 1.5 अरब रुपए लिए थे। किताब में ये भी दावा किया गया है कि 1989 में उस समय PM रहीं बेनजीर भुट्टो के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मूव को सपोर्ट करने के लिए 27 करोड़ रुपए का इस्तेमाल किया गया था।
2013 में PTI के लीडर और इंटेलीजेंस ब्यूरो के पूर्व डायरेक्टर जनरल मसूद शरीफ खान ने भी भुट्टो के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मूव पर IB फंड के गलत इस्तेमाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट में बयान दिया था। उस वक्त प्रेसिडेंट गुलाम इशाक खान और आर्मी चीफ असलम बेग नहीं चाहते थे कि भुट्टो सत्ता में रहें।

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