प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगे. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं हो सकते. करतारपुर कॉरिडोर खोलने का ये मतलब नहीं कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत शुरू हो जाएगी.
सुषमा स्वराज ने कहा कि बातचीत के लिए आज भी हमारी शर्त यही है कि पाकिस्तान पहले आतंकवाद को शह देना छोड़े. करतारपुर को बातचीत से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए. विदेश मंत्री ने कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद खत्म नहीं करता, हम उनके बुलावे पर प्रतिक्रिया नहीं देंगे, इसलिए हम सार्क में हिस्सा नहीं लेंगे. भारत सरकार कई वर्षों से करतारपुर कॉरिडोर खोलने की मांग कर रही है जिसपर पाकिस्तान की ओर से सकारात्मक पहल हुई है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत शुरू हो जाएगी.
भारतीय विदेश मंत्री का बयान काफी महत्वपूर्ण समय में आया है. कश्मीर के ख्यातिप्राप्त पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या में संलिप्त आतंकी नवीद जट सुरक्षा बलों द्वारा मुठभेड़ के दौरान मारा गया है. नवीद जट मूल रूप से पाकिस्तान के मुल्तान का रहने वाला था. उधर दूसरी ओर करतारपुर कॉरिडोर के लिए दोनों ओर शिलान्यास हो रहा है.


पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा था कि हम नरेंद्र मोदी को सार्क सम्मेलन में शामिल होने के लिए न्योता भेजेंगे. पाक ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि भारत अगर बातचीत और दोस्ती के लिए एक कदम बढ़ाता है तो हम दो कदम बढ़ाएंगे. ज्ञात है कि 19वें सार्क शिखर सम्मेलन का आयोजन 2016 में पाकिस्तान में किया जाना था लेकिन भारत समेत बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने इस समिट में हिस्सा नहीं लिया था.
सार्क की स्थापना 1985 में की गई थी. जिसमें दक्षिण एशिया के अफगानिस्तान, भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीव कुल आठ देश शामिल हैं. इसमें आठों राष्ट्राध्यक्षों की बैठक होती है. 19वां सार्क शिखर सम्मेलन 2016 में पाकिस्तान होना था. सम्मेलन के पूर्व 18 सितंबर को उड़ी में भारतीय आर्मी कैंप पर आतंकी हमला हुआ था और इसीके विरोध में भारत ने सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया था. बांग्लादेश घरेलू परिस्थितियों का हवाला देते हुए शामिल नहीं हुआ था. आखिरी सार्क शिखर सम्मेलन 2014 में काठमांडू में आयोजित किया हुया था.



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