भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मनी की चालंसर एंजेला मर्केल के साथ संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा भारत और जर्मनी ‘मेड फॉर ईच अदर’ हैं।
जर्मनी को भारत के रूप में शक्तिशाली, हमेशा तैयार और भरोसेमंद साझेदार मिला है। भारत-जर्मनी के रिश्तों से दुनिया पर सकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच आने वाले मौकों और एशिया, यूरोप के साथ ही पूरी दुनिया में आने वाली चुनौतियों पर सकारात्मक चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जर्मनी भारत के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम में बड़ा साझीदार है और ये भागीदारी लगातार बढ़ती रहेगी। इस दौरान भारत और जर्मनी के मध्य 8 महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी की चालंसर एंजेला मर्केल ने साझा बयान जारी करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध नई उंचाई पर पहुंचे हैं। मोदी ने कहा कि जर्मनी स्किल्स के मामले में बेहद आगे है, इससे हमारे देश के युवाओं को फायदा होगा। नवीनीकरण उर्जा को लेकर जर्मनी के सहयोग से हमें आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
एंजेला मर्केल ने साझे बयान में कहा कि हम भारत देश के विकास में सक्रिय साझेदार बने रहेंगे। भारत एक बड़ी ताकत है और जर्मनी उसके साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार है।
जर्मनी भारत में 1 बिलियन यूरो का निवेश विकास कार्यों को आपसी साझेदारी के तहत करेगा।
मोदी ने कहा कि जर्मनी में उनका जिस तरह से स्वागत हुआ, उससे वो बेहद गदगद हैं। उनका मंगलवार को ऑफिशियल वेलकम हुआ। बर्लिन में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद मोदी और जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने इंडिया-जर्मनी इंटर-गवर्नमेंटल कॉन्सुलेशन्स (ICG) की मीटिंग में शिरकत की।

इंडो-जर्मन बिजनेस समिट में मोदी ने कहा कि हमारी इकोनॉमिक पार्टनरशिप काफी मजबूत है। इसे और आगे बढ़ाने के लिए हम जर्मन कंपनीज का स्वागत करने के लिए बाहें फैलाकर खड़े हैं। मेक इन इंडिया ने बड़ा असर डाला है। जर्मनी मेक इन इंडिया को कामयाब बनाने के लिए बड़े पैमाने पर सहयोग कर रहा है। GST देश का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कर सुधार है, जो अगले महीने से लागू हो रहा है। भारत सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें भी सुधारों को लागू करने में दिलचस्पी दिखा रही हैं। भारत की FDI पॉलिसी पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा उदार है, जहां 90% फॉरेन इन्वेस्टमेंट ऑटोमैटिक रूट से होता है।
PM ने कहा कि रेलवे के मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम में भी जर्मनी भारत की मदद कर सकता है क्योंकि वो हमारा भरोसेमंद पार्टनर है।
दोनों देशों के बीच साइबर पॉलिटिक्स, डेवलपमेंट इनिशियेटिव्स, सस्टेनेबल अरबन डेवलपमेंट, कॉन्टिन्यूड डेवलपमेंट ऑफ क्लस्टर मैनेजर्स एंड स्किल डेवलपमेंट, डिजिटलाइजेशन की फील्ड में कोऑपरेशन, रेलवे सिक्युरिटी की फील्ड में कोऑपरेशन, सस्टेनेबिलिटी के लिए इंडो-जर्मन सेंटर पर कॉन्टिन्यूड कोऑपरेशन और वोकेशनल ट्रेनिंग को बढ़ावा देने सम्बन्धी 8 करार हुए।
मोदी के साथ गए कॉमर्स मिनिस्टर निर्मला सीतारमण, एनर्जी मिनिस्टर पीयूष गोयल और विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने भी अपने जर्मन काउंटर पार्ट्स से बातचीत की। भारत में जर्मनी की 1600 कंपनियां हैं। इनमें 600 ज्वाइंट वेंचर हैं। जर्मनी भारत में सातवां सबसे बड़ा इन्वेस्टर है। अप्रैल 2000 से मार्च 2017 तक 9.69 अरब डॉलर का इन्वेस्टमेंट हुआ, 2016 में 19.48 अरब डॉलर का कारोबार हुआ।

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