जम्मू कश्मीर में आतंकी दानिश अहमद ने हंदवाड़ा पुलिस और सेना की 21 राष्‍ट्रीय राइफल्‍स के सामने आत्‍मसमर्पण कर दिया। उसे हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर सबजार भट्ट की शव यात्रा में देखा गया था।
हिजबुल कमांडर सबजार अहमद को जम्मू कश्मीर में 27 मई को हुए एनकाउंटर में मार गिराया गया था। बुहरान वानी के मारे जाने के बाद सबजार को हिजबुल मुजाहिद्दीन का टॉप कमांडर बनाया गया था। उसको ‘सब डॉन’ के नाम से भी जाना जाता था।
सोशल मीडिया पर संगठन की ओर से आने वाले कई वीडियोज और फोटोज में बजार को देखा गया। सबजार को कश्मीर में A++ केटेगरी का आतंकी माना जाता था। सबजार बुहरान वानी का खास था। दोनों को बचपन का दोस्त बताया जाता है। एनकाउंटर वाले दिन 27 वर्षीय सबजार करीब 10 घंटे तक एक भी गोली चलाए बिना दुबका रहा था।

दानिश अहमद कुलगाम का रहने वाला है और इसके पिता का नाम फारूक अहमद है। दानिश, दून कृषि विज्ञान और तकनीक पीजी कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई कर रहा था। पुलिस के मुताबिक दानिश को वर्ष 2016 में हंदवाड़ा में हुए पत्‍थरबाजी की घटनाओं में शामिल पाया गया था। उसे पुलिस ने पकड़ा था लेकिन उसके करियर को देखते हुए उसे काउंसलिंग के बाद छोड़ कर दिया गया था।
पुलिस और सेना ने दानिश के माता-पिता को बुलाकर उसे आत्‍मसमर्पण कराने को कहा था। उसके माता-पिता को बताया गया था कि अहमद अगर आत्‍मसमर्पण कर देता है तो उसके साथ अच्‍छा बर्ताव होगा। सुरक्षाबलों की ओर से कई तरह के प्रयास किए गए थे जिसके बाद दानिश ने सरेंडर कर दिया।
दानिश से जब पूछताछ हुई तो उसने बताया कि वह साउथ कश्‍मीर में आतंकियों के संपर्क में थो और उनके जोर देने पर वह हिजबुल का हिस्‍सा बन गया था। उससे नॉर्थ कश्‍मीर के कुछ युवाओं को सक्रिय करने के लिए कहा गया था और उसे यह सुनिश्चित करना था कि घाटी में आतंकी वारदातों में तेजी आए। हालांकि बाद में उसे लगा कि यह बिल्‍कुल बेकार काम है और फिर उसने सरेंडर करने का फैसला किया।

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