अमेरिका के वाशिंगटन में डेमोक्रेटिक पार्टी की सिनेटर मोना दास ने हाथ में गीता रखकर अपने पद की शपथ ली और ‘जय हिंद’ तथा ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगाए.
बिहार के मुंगेर जिले की मूल निवासी मोना दास ने मकर संक्रांति के दिन शपथ लेते मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं, हिंदी में ‘नमस्‍कार’ व ‘प्रणाम’ बोलने के साथ ही अपने संबोधन में महात्‍मा गांधी व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ भी की. मोना ने बेटियों की शिक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक लड़की को शिक्षित करने से पूरा परिवार तथा आने वाली पीढ़ियों को भी शिक्षित किया जा सकता है. उन्होंने सिनेटर के रूप में लड़कियों को आगे बढ़ाने में अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की. मोना को सीनेट हाउसिंग स्टेबिलिटी एंड अफोर्डेबिलिटी कमेटी की वाइस चेयरमैन का कार्यभार दिये जाने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है.
मुंगेर जिले के दरियापुर गांव में जन्मी इस बेटी के दादा डॉ. गिरिश्वर नारायण दास दरभंगा, भागलपुर और गोपालगंज में सिविल सर्जन रह चुके हैं. मोना के पिता सुबोध दास व सगे चाचा अजय दास अमेरिका में इंजीनियर हैं जबकि एक अन्य चाचा विजय दास वहीं पर डॉक्टर हैं. कैलिफोर्निया में इंजीनियर सुबोध दास की बेटी मोना दास के चचेरे दादा अशोक मोदी, अरुण कुमार मोदी, चचेरी दादी चमेली देवी, चाचा पप्पू चौरसिया, गोपाल चौरसिया, कन्हैया चौरसिया व मुकेश चौरसिया आदि सभी अपनी मोना की इस उपलब्धि से गदगद हैं.
सन् 1971 में मोना का जन्म दरभंगा मेडिकल कॉलेज व अस्‍पताल में हुआ था तब उनके पिता यहां आए थे. बाद में वो मोना और उसकी मां को अमेरिका ले गए. मोना के भाई सोम दास का जन्म अमेरिका में हुआ. मोना 1984 में दरियापुर गांव आईं थीं, उसके बाद से वे यहां नहीं आयीं हैं. मोना एवं उनके छोटे भाई की शादी अमेरिका में हुई है. मोना के पिता सुबोध दास आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं और दो वर्ष पूर्व एक शादी समारोह में शामिल होने दरियापुर आए थे. सबकी अब एक ही तमन्ना है कि मोना एक बार अपने जन्म स्थान आवे.
मोना दास ने अमेरिका के सिनसिनाटी विश्विविद्यालय से मनोविज्ञान में स्नातक की डिग्री लेने के बाद पिंचोट विवि से प्रबंधन में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है. परन्तु जनसेवा एवं जन सरोकार में अत्यधिक रुचि रहने के कारण वे राजनीति में ही जनसेवा के बल पर आगे बढ़ती गयीं. सीनेटर बनने के बाद मोना दास भी अपने पैतृक गांव आना चाहती हैं. उनके शब्दों में कहा जाए तो- ”मुझे अपने पैतृक गांव जाने की बहुत इच्छा है और मैं बिहार के साथ-साथ देश के सभी हिस्सों में घूमना चाहती हूँ. भारत मेरा मूल देश है और मुझे अपने देश पर गर्व है.”
मोना के दादा डॉ. गिरिश्वर नारायण दास गोपालगंज से सेवानिवृति के बाद कुछ वर्षों तक अपने गांव दरियापुर में रहे. जहाँ उनके पास एक बगीचा और 60 बीघा खेती योग्य जमीन थी. बाद में वो भी अपने बेटों के पास अमेरिका चले गए. अपने बगीचे के समीप उन्होंने अपने नाम से एक उच्च विद्यालय खुलवाया था, पर बाद में उस भवन में बच्चों का स्कूल खोल दिया गया.



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