अमेरिका में पाकिस्तान के एम्बेसेडर ने एक प्रोग्राम में ज्योंही कहा कि हमारे देश को आतंकियों के पनाहगाह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, वहाँ मौजूद हजारों लोग हंस पड़े। हाँलाकि श्रोताओं के रिएक्शन से शर्मसार पाकिस्तानी एम्बेसेडर ने सफाई भी दी लेकिन ठहाके रुकने का नाम नहीं ले रहे थे जिसपर वो झुंझला भी गए।
अटलांटिक काउंसिल के साउथ एशिया सेंटर ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर एक कान्फ्रेंस ऑर्गनाइज की थी। इसमें भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और अमेरिका के डिप्लोमैट्स भी मौजूद थे। इसी दौरान पाकिस्तान एम्बेसेडर की स्पीच के दौरान ये वाकया हुआ। इस काउंसिल की रिपोर्ट्स को अमेरिकी संसद भी मानती आई है।
कान्फ्रेंस में अमेरिका में पाकिस्तान के एम्बेसेडर एजाज अहमद चौधरी, भारत के मनीष तिवारी, अफगानिस्तान के एम्बेसेडर मुहम्मद असद और अमेरिकी डिप्लोमैट जाल्मी खालीजाद के अलावा कुछ मशहूर जर्नलिस्ट्स भी प्रोग्राम में बतौर मेहमान मौजूद थे। सबको बारी-बारी से अपनी बात रखने का मौका दिया गया। करीब डेढ़ हजार लोग भी मौजूद थे और इन्हें मेहमानों से सवाल पूछने की इजाजत थी।
पाकिस्तान के एम्बेसेडर एजाज अहमद चौधरी ने भी अपनी बात रखी और इसी दौरान लोगों ने सवाल भी पूछे। एक सवाल के जवाब में जैसे ही उन्होंने कहा कि “पाकिस्तान आतंकियों के लिए महफूज पनाहगाह नहीं है” लोग हंसने लगे, इस पर पहले तो चौधरी शर्मसार हुए फिर झुँझला उठे।

चौधरी से एक अमेरिकी जर्नलिस्ट ने पूछा कि- मुल्ला उमर अफगानिस्तान से भागकर कराची में इलाज करा रहा था, जहाँ उसकी मौत हो गई। लादेन भी अफगानिस्तान से भागकर पाकिस्तान में आलीशान बिल्डिंग में ऐशो-आराम से रह रहा था। इसके बावजूद आप कैसे कह सकते हैं कि पाकिस्तान आतंकियों का सुरक्षित पनाहगाह नहीं है?
इस सवाल से तिलमिलाए एजाज ने कहा कि- “अगर आप पुराने बातों को ही याद करते रहेंगे तो आगे का रास्ता कैसे निकलेगा? इसमें हंसने की क्या बात है?”
अफगानिस्तान, इराक और यूएन में अमेरिकी एम्बेसेडर रह चुके जाल्मी खालीजाद ने कहा कि- पाकिस्तान सच्चाई को छुपाता क्यों है? हमारे पास पुख्ता सबूत हैं कि मुल्ला उमर पाकिस्तान में ही था, वहां आराम से रहा और फिर वहीं के हॉस्पिटल में उसने बीमारी का इलाज कराया। हम लादेन को खोज रहे थे लेकिन वो तो पाकिस्तान में आराम फरमा रहा था, क्या ये सच्चाई नहीं है? इस बात के भी ढेरों सबूत हैं कि हक्कानी नेटवर्क के हर नेता को पाकिस्तान पनाह देता है।

काउंसिल के एक्सपर्ट एश्ले टेलिस ने कहा कि- पाकिस्तानी सरकार और सेना आतंकियों को पनाह देती है, इसके सबूत तो हर जगह मौजूद है। अमेरिका को अब इस मामले में बेहद सख्ती से पेश आना होगा।
अफगान एम्बेसेडर ने कहा कि हमारे प्रेसिडेंट ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ से साफ कह दिया है कि अगर अफगानिस्तान में आतंकी हमले होतें हैं तो इसका जिम्मेदार पाकिस्तान ही होगा, और इसके नतीजे खतरनाक होंगे। उन्होंने कहा कि तालिबान के तमाम नेता पाकिस्तान से ऑपरेट कर रहे हैं, अमेरिकी सांसदों को ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन पर इस बात के लिए दबाव डालना चाहिए कि वो पाकिस्तान को लेकर सख्त पॉलिसी बनाएं ताकि वहां आतंकवाद खत्म किया जा सके।
इसके बाद चारों तरफ से घिरे एजाज अहमद चौधरी ने कहा कि हम चाहते हैं कि अफगानिस्तान में अमन कायम हो, लेकिन वहां भारत अपनी स्थिती मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत अफगानिस्तान के जरिए पाकिस्तान को घेरना चाहता है। पाकिस्तान को हमेशा कसूरवार ठहराना सही नहीं है। हमने अफगानों की मदद की है। भारत अफगानिस्तान को हर तरह की मदद देता है क्योंकि वहां उसके इंटररेस्ट्स हैं। ये दोहरी नीति नहीं तो और क्या है?

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