वंदे मातरम् पर मध्यप्रदेश से शुरू हुई राजनीती दिल्ली तक पहुंच गई. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कमलनाथ सरकार के फैसले पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार हिन्दुस्तान के हृदय मध्यप्रदेश को तुष्टिकरण का केंद्र बना रही है. वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपना फैसला वापस लेते हुए इसे नए स्वरुप में गाने की तैयारी की है.
अमित शाह ने बकायदा सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से कहा कि मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ गाने पर प्रतिबन्ध लगाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं शर्मनाक है.वंदे मातरम् मात्र एक गीत भर न होकर भारत की स्वतंत्रता आन्दोलन का प्रतीक एवं प्रत्येक भारतीय का प्रेरणाबिंदु है.
शाह ने लिखा कि ‘वंदे मातरम्’ पर प्रतिबन्ध लगाकर कांग्रेस ने न सिर्फ देश की स्वाधीनता के लिए वंदे मातरम् का जयघोष कर अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले वीर बलिदानियों का अपमान किया है बल्कि यह मध्यप्रदेश की जनता के साथ भी विश्वासघात है. किसी भी प्रकार की राजनीतिक सोच में देश के बलिदानियों का अपमान करना मेरे जैसे एक आम भारतीय की दृष्टि में देशद्रोह के समान है. ‘वंदे मातरम्’ किसी एक वर्ग विशेष का नहीं है बल्कि भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण आहूत करने वाले लाखों सेनानियों के त्याग का प्रतीक है और केवल एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए इसका अपमान करना बहुत ही दुखद, शर्मनाक एवं देश की स्वतंत्रता का अपमान भी है. कांग्रेस के इस दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय पर राहुल गांधी को देश की जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए. मैं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से पूछना चाहता हूं कि ‘वंदे मातरम्’ का यह अपमान क्या उनका निर्णय है?
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इससे पहले ही कमलनाथ सरकार को जमकर घेरते हुए सात जनवरी को सभी 109 भाजपा विधायकों के साथ मंत्रालय के बाहर वंदे मातरम् के सामूहिक गायन का ऐलान किया है. उन्होंने ट्वीट कर कांग्रेस सरकार को कोसते हुए लिखा था कि, अगर कांग्रेस को राष्ट्र गीत के शब्द नहीं आते हैं या फिर वंदे मातरम गाने में शर्म आती है तो मुझे बता दें! मैं हर महीने की पहली तारीख को वल्लभ भवन के प्रांगण में जनता के साथ वंदे मातरम गाऊंगा. वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी इस फैसले के खिलाफ वल्लभ भवन के बाहर प्रदर्शन किया था.


वंदे मातरम का गायन हर महीने की पहली तारीख पर होता था, ये परंपरा पिछले 13-14 सालों से निभाई जा रही थी. हर महीने की पहली तारीख को मंत्रालय के सामने स्थित पार्क में अधिकारी-कर्मचारी वंदे मातरम गायन में शामिल होते थे और उसके बाद काम शुरू होता था. तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने इस परंपरा को शुरू किया था, लेकिन नए साल की पहली तारीख को ये आयोजन नहीं हुआ.
वहीं दूसरी ओर इस विवाद को लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपना फैसला वापस लेते हुए इसे नए स्वरुप में गाने की तैयारी कर ली है. अब हर महीने के पहले दिन सुबह 10.45 बजे पुलिस बैंड की धुन पर इसे गाया जाएगा. यही नहीं इस दिन सभी सरकारी कर्मचारी शौर्य स्मारक से वल्लभ भवन तक मार्च करेंगे और इसमें आम लोगों को भी जोड़ा जाएगा. इस संबंध में सरकार ने आदेश जारी कर दिया. कमलनाथ ने विपक्ष को नसीहत देते हुए लिखा कि प्रदेश की जनता ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, उसे समालोचना से निभाएं और इस तरह वंदेमातरम् को सही अर्थों में चरित्रार्थ करें.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने ब्लॉग में ‘वंदे मातरम’ गीत का आजादी की लड़ाई के दौरान और आजादी के बाद के अर्थ को विस्तार से बताया. उन्होंने लिखा कि, वंदेमातरम का अर्थ आजादी की लड़ाई के दौरान भारत मां को ब्रिटिश हुकुमत से मुक्त कराना था और आजादी के बाद इसका अर्थ भारत मां की वंदना करना है. भारत मां की वंदना के लिए वो किसानों के हरे-भरे खेतों की खुशियों के लिए उनकी कर्जमाफी और फसलों के सही दाम सुनिश्चित कर रहे हैं. वे सुख देने वाला सुशासन लाने लिए निरंतर कोशिश कर रहे हैं. बेटियों के जीवन में खुशियों के लिए सशक्तिकरण, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और गरीबों के लिए 20 दिन से सरकार काम कर रही है.



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