जहां एक तरफ़ देश के कई राज्यों में सरकारी स्कूल के लिए बिल्डिंग और शिक्षक न होने की ख़बरें आम बात हैं, वहीं अगर आपको जानकारी मिले कि कोई राज्य सरकार जून 2017 से अपने तमाम सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से ही डिजिटल एजुकेशन अनिवार्य कर देगी तो आपको कैसा लगेगा.
जी हाँ, 2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां की साक्षरता दर 93.91% थी. जिसने प्राथमिक शिक्षा के मामले में अब 100% का आंकड़ा छू लिया है. यहां की साक्षरता दर, शिक्षा के मामले में भारत के अन्य सभी राज्यों के लिए रोल मॉडल रहा है.
शिक्षा को मिशन मानने वाले इस राज्य ने क्वालिटी एजुकेशन की ओर एक और कदम बढ़ा दिया है. राज्य के शिक्षा विभाग ने ‘सूचना और संचार’ को महत्व देते हुए एक अहम फ़ैसला लिया है. प्रदेश में जून 2017 से सभी 9279 सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से ही डिजिटल एजुकेशन अनिवार्य हो जाएगी. वहाँ की सरकार ने इसके लिए शिक्षकों की ट्रेनिंग भी शुरू कर दी है.

राज्य सरकार ने मिशन ‘IT@School Project’ के अंतर्गत 2005 से ही 8th to 12th (हाई स्कूल) में डिजिटल शिक्षा की व्यवस्था कर दी थी. अब Lower Primary और Upper Primary की कक्षाओं में भी कंप्यूटर लैब और स्मार्ट क्लास से ही पढ़ाई होगी. इसके लिए शिक्षा विभाग ने ‘e@Vidya’ नाम से हर विषय की Text Book बनाई हैं, जो एक Free Open Source सॉफ्टवेयर है. ये पुस्तकें अंग्रेज़ी,मलयालम, तमिल और कन्नड़ में उपलब्ध करायी गयी है, जिससे कि बच्चों के सामने भाषा की कोई समस्या न आने पाए.
‘ जहां चाह, वहां राह’ के तर्ज़ पर सरकारें अगर अपने कर्तव्य के प्रति गंभीर हों, तो सभी लोगों तक गुणवत्ता युक्त शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन आदि सभी तक पहुंचाया जा सकता है. हिंदी प्रदेशों के सरकारी स्कूलों की कहानी किसीसे छुपी नहीं है, परन्तु केरल सरकार का ये फ़ैसला पुरे राष्ट्र को इस पर सोचने को मजबूर करने को पर्याप्त है. राज्य सरकार की यह गंभीरता क़ाबिल-ए-तारीफ़ है.

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