स्वास्थ्य का स्थान धन से ऊपर है, कहावत है कि- ‘पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया’. इसलिए दीपावली में सबसे पहले धनतेरस का महत्व है. कार्तिक माह की कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व दीपावली आगमन की पूर्व सूचना देता है. धनतेरस को भगवान धनवन्तरि और यमराज की पूजा का महत्व है. इस दिन नया मुंग, मोठ, चावल, बाजरा, तिल, झाड़ू और धातु खरीदना शुभ है.
शास्त्रों के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए विष्णु के अंशावतार भगवान धनवंतरी अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए. 25 अक्‍टूबर 2019 को शाम 7 बजकर 8 मिनट से रात 8 बजकर 13 मिनट तक धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त है. इस दिन घर में अच्छी तरह साफ-सफाई कर गौमूत्र का छिड़काव करना चाहिए. सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाकर परिक्रमा करनी चाहिए, रात में तुलसी को स्पर्श नहीं किया जाता.
धन संपत्ति की प्राप्ति हेतु कुबेर देवता के लिए घर के पूजा स्थल पर दीप दान करें एवं मृत्यु देवता यमराज के लिए मुख्य द्वार पर दीप दान करें. सोने- चांदी की खरीददारी करने के साथ ही लोहे की कोई वस्‍तु दान भी करनी चाहिए. धनतेरस के दिन वस्‍त्र दान महादान माना जाता है, किसी गरीब व्‍यक्ति को नए पीले वस्‍त्र दान करना चाहिए.
धनतेरस पर कम से कम किसी एक गरीब को घर बुलाकर पूरे आदर और सम्‍मान के साथ भोजन करवाना चाहिए. भोजन में चावल की खीर और पूड़ी अवश्य रखना चाहिए तथा दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए. किसी गरीब को नारियल और मिठाई दान करने से भी दान करने वाले का भंडार साल भर भरा रहता है और उसे कभी भी तंगी का सामना नहीं करना पड़ता.
आपका कोई करीबी लगातार पैसों की तंगी से जूझ रहा है तो धनतेरस के दिन आप उसे झाड़ू खरीदकर दें. ऐसा करने से मां लक्ष्‍मी आप पर तो प्रसन्‍न होंगी ही साथ में आपकी अच्‍छी भावना को देखकर आपके करीबी को दरिद्रता दूर करेंगी. अकाल मृत्यु से बचने के लिए धनतेरस के दिन घर के मेन गेट पर बाहर की ओर 4 बातियों का दीपदान करना चाहिए.


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