प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि हमने परमाणु बम दिवाली के लिए नहीं रखा है. PM ने राजस्थान के बाड़मेर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने पाकिस्तान से डरने की नीति छोड़ दी है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान हर दूसरे दिन भारत को धमकी भरे अंदाज में कहता था कि उसके पास परमाणु बम है. लेकिन भारत ने अब उसकी धमकी से डरने की नीति को छोड़ दिया है. मोदी ने जनता से पूछा- क्या मैंने सही किया? तो जनता का जवाब था- हाँ. उसके बाद PM ने जनता से कहा कि अगर उनके पास परमाणु बम है तो फिर हमारे पास क्या है? क्या हमने परमाणु बम दिवाली के लिए रखे हैं?
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने घर में घुसकर आतंकवादियों को मारा. चोट वहां लगी और दर्द यहां हुआ. आज का भारत बिना युद्ध के पाकिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर आतंकियों को ढेर कर रहा है. पाकिस्तान को मिली खुली छूट के कारण देश में आतंकी हमले आम बात थी. आपके वोट के कारण ये आतंकवादी अटैक कम हुआ है, हमने पाकिस्तान की सारी हेकड़ी निकाल दी है, कटोरा लेकर दुनियाभर में घूमने को मजबूर कर दिया है. आतंकियों के मन में डर पैदा कर दिया है. हमारी सरकार के दौरान ही भारत दुनिया की उन शक्तियों में शामिल हुआ जिनके पास जल, थल, नभ, तीनों जगहों से न्यूक्लियर हमला करने की क्षमता है. हाल में एक बहुत बड़ा काम हुआ है और अब हमने अंतरिक्ष में भी अपने संसाधनों को बचाने की क्षमता हासिल कर ली है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के नामदार कहते हैं कि मोदी को सेना के शौर्य की बात नहीं करनी चाहिए, तो क्या मैं भजन करने आया हूँ. 1971 की लड़ाई में हमारे सैनिकों के शौर्य के कारण पाकिस्तान का एक बड़ा हिस्सा हमारे कब्जे में था, 90 हजार पाकिस्तानी सैनिक हमारे पास थे. उसके बाद शिमला में क्या हुआ? सरकार ने टेबल पर वो सब गंवा दिया जो जवान जीतकर लाए थे. 90 हजार सैनिक भी वापस कर दिए और सारी जमीन भी. वो सुनहरा मौका था, जम्मू कश्मीर की समस्या को हल करने का, घुसपैठ की समस्या को हल करने का, लेकिन कांग्रेस ने मौका गंवा दिया.
पीएम ने कहा कि वर्षों से नैशनल वॉर मेमोरियर की मांग हो रही थी, कांग्रेस ने अपने परिवार के लिए स्मारक बनवाए, परिवार के लिए समाधियां बनाईं, लेकिन देश के जवानों के बलिदान को याद करने के लिए कोई राष्ट्रीय स्मारक नहीं बनाया. आपके चौकीदार ने दिल्ली में आन, बान, शान के साथ आजादी के बाद से अब तक शहीद हुए सैनिकों का स्मारक बनवा दिया. कांग्रेस और उसके साथियों में सेना के जवानों के प्रति सोच ही अलग है. कर्नाटक में सरकार कांग्रेस के कारण ही चल रही है, वहां के मुख्यमंत्री कहते हैं कि जिन लड़कों के पास खाने के लिए कुछ नहीं वो ही सेना में जाते हैं.


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