कुंभ में चल रही विश्व हिंदू परिषद की धर्मसंसद के दूसरे और अंतिम दिन शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मामला निर्णायक दौर में है. मंदिर बनने के किनारे पर है, इसलिए हमें सोच समझकर कदम उठाना है.
मोहन भागवत ने कहा कि जनता में प्रार्थना, आवेश और जरूरत पड़ी तो आक्रोश भी जगाया जाना चाहिए. मैं समझता हूं कि 4-6 महीने (चुनावी वक्त) की उथल-पुथल के दौरान कुछ हुआ तो ठीक, वरना उसके बाद तो कुछ जरूर होगा. यह हम सब देखेंगे. हालांकि, उनकी इस बात पर कुछ संत नाराज हो गए और नारेबाजी करने लगे. संतों ने कहा कि अब विहिप और आरएसएस को समय नहीं देंगे, मंदिर निर्माण की तारीख चाहिए.
सरसंघचालक ने कहा कि अगर जरुरत पड़ी तो हमें कहना पड़ेगा, अब धैर्य नहीं चलेगा. छह अप्रैल को एक करोड़ लोग विजय मंत्र का जाप करेंगे. आगे अगर मंदिर निर्माण से जुड़ा हुआ कोई कार्यक्रम करेंगे तो उसका प्रभाव चुनाव पर पड़ेगा. मंदिर बनाना है तो मंदिर बनाने वालों को चुनना होगा. यह भी देखना होगा कि, मंदिर कौन बनाएंगे, यह मंदिर उद्गम और हिंदू राष्ट्र का वैभवशाली मंदिर होगा.
संघ प्रमुख ने नागरिकता संबंधी विधेयक की ओर संकेत और मोदी सरकार की परोक्ष रूप से सराहना करते हुए कहा कि पड़ोसी देशों से सताये गये हिंदू अगर यहां आते हैं तो वे नागरिक बन सकते हैं, यह किसने किया है? उन्होंने कहा कि जिन शब्दों में और जिस भावना से राम मंदिर निर्माण का यह प्रस्ताव यहां आया है, उस प्रस्ताव का अनुमोदन करने के लिए मुझे कहा नहीं गया है, लेकिन उस प्रस्ताव का संघ के सर संघचालक के नाते मैं संपूर्ण अनुमोदन करता हूँ.
मोहन भागवत ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के फैसले से यह साबित हो गया था कि ढांचे के नीचे मंदिर है. हमारा विश्वास है कि वहां जो कुछ बनेगा वह भव्य राम मंदिर बनेगा और कुछ नहीं बनेगा. दूसरी बात, सरकार को हमने कहा कि तीन साल तक हम आपको नहीं छेड़ेंगे. उसके बाद राम मंदिर, सरकार में मंदिर और धर्म के पक्षधर हैं. ‘न्यायालय ने कह दिया कि यह उसकी प्राथमिकता में नहीं है.’ न्यायालय से जल्द निर्णय की व्यवस्था के लिए अलग पीठ बन गयी, लेकिन कैसी-कैसी गड़बड़ियां करके उसे निरस्त किया गया, आप जानते हैं.
संघ प्रमुख ने कहा कि- हालांकि, सरकार ने अपना इरादा (उच्चतम न्यायालय में अर्जी लगाकर) जाहिर कर दिया है, ऐसा मुझे लगता है. उन्हें लगा कि जिसकी जमीन है, उसे वापस कर देते हैं. इस समय हमें भी यह देखना चाहिए कि मंदिर कौन बनायेगा?
इसके पूर्व धर्मसंसद में महामंडलेश्वर अखिलेशानन्द महाराज ने राम जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण की बाधाओं को दूर करने के लिए प्रस्ताव रखा. चर्चा के बाद संतों ने मोदी सरकार पर भरोसा जताते हुए कहा कि मंदिर निर्माण में बाधाओं को दूर करने के लिए अब जनजागरण अभियान चलाया जाएगा. स्वामी चिन्मयानंद महाराज ने कहा कि कई वर्षों की तपस्या के बाद केंद्र में मोदी और प्रदेश में योगी सरकार है. पूरी उम्मीद है कि PM मोदी मंदिर निर्माण में कीर्तिमान स्थापित करेंगे.
पहले दिन धर्म संसद सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश, हिंदू समाज के विघटन, धर्मांतरण, मिशनरी, साम्यवाद, कट्टरवादी इस्लामिक ताकतों के बढ़ते प्रभाव के इर्द-गिर्द रही. संतों ने मंच से देश की बदलती सियासत पर भी हमला बोला. मुस्लिम-दलित, क्षेत्र और जातिगत चुनावी गठबंधन को देश के लिए खतरा बताते हुए विदेशी ताकतों की साजिश बताया.
इससे पहले परमधर्म संसद में धर्मादेश पारित कर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने वसंत पंचमी से अयोध्या कूचकर 21 फरवरी को राम मंदिर के लिए शिलान्यास की घोषणा की है. वहीं, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने भी शंकराचार्य के परम धर्मादेश का स्वागत व समर्थन करते हुए चार फरवरी के बाद अयोध्या कूच करने का निर्णय लिया है.



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