डोनाल्ड ट्रम्प और नरेंद्र मोदी की पहली मुलाकात से पहले भारत प्रीडेटर ड्रोन के नेवी वर्जन को हासिल करने की कोशिश कर रहा है। भारत सर्विलांस ड्रोन को खरीदने के लिए भेजी गई रिक्वेस्ट पर US की मंजूरी हासिल करने के लिए जोर लगा रहा है। मोदी US दौरे पर US राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद दोनों देशों को रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश करेंगे।
ये ड्रोन अगर भारत को मिलते हैं तो वो इनकी मदद से अपनी 7500 किलोमीटर लंबी कोस्टलाइन (तटरेखा) पर नजर रखेगा। डील के लिए स्टेट डिपार्टमेंट की मंजूरी हासिल करनी है। इन गार्जियन ड्रोन्स को कैलिफोर्निया की जनरल ऑटोमिक्स बनाती है।
22 अनआर्म्ड ड्रोन हासिल करने को अमेरिका और भारत के डिफेंस रिलेशन को मजबूत करने की अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। ये डिफेंस रिलेशन ओबामा के वक्त तो काफी आगे बढ़े, लेकिन ट्रम्प के आने के बाद से थोड़े कमजोर हो गए। क्योंकि ट्रम्प ने नॉर्थ कोरिया के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक लगाने के लिए अपने एशियाई विरोधी चीन से समर्थन मांगा है। मोदी की विजिट से पहले ट्रम्प चीन के प्रेसिडेंट शी जिंगपिंग से अप्रैल में मिले थे। इसके बाद उन्होंने जापान, ब्रिटेन और वियतनाम के लीडर्स से भी मुलाकात की। इन मुलाकातों ने भारत में इस बात की फिक्र बना दी है कि अमेरिका की प्राथमिकता में अब इंडिया नहीं है।

भारत अगर ये सर्विलांस ड्रोन हासिल करने में कामयाब होता है तो वो इनसे भारतीय समुद्रों पर नजर रखेगा। इसके साथ ही ये ऐसी पहली डील होगी, जो गैर नाटो सदस्य देश के साथ अमेरिका करेगा। डील पर नजर रख रहे एक ऑफिशियल के अनुसार हम कोशिश कर रहे हैं कि ये हमारे एजेंडा के टॉप पर आ जाए। ये ऐसी चीज (सर्विलांस ड्रोन) है, जो हमें दूसरे आइटम्स से पहले मिल सकते हैं। हाल ही में अमेरिका ने इंडिया को अपना अहम रक्षा सहयोगी बताया है। भारत अमेरिकी हथियारों का बड़ा खरीदार भी है।
सूत्रों के अनुसार US स्टेट डिपार्टमेंट में इस बात को लेकर चिंता है कि अगर इस तरह के हाईटेक ड्रोन भारत को दिए गए तो साउथ एशिया में अस्थिरता आ सकती है। क्योंकि, यहां हमेशा ही पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव बना रहता है, खासतौर से कश्मीर को लेकर। हालांकि US सीनेटर जॉन कॉर्नीन और मार्क वार्नर ने मार्च में डिफेंस सेक्रेटरी जेम्स मैटिस और सेक्रेटरी ऑफ स्टेट रेक्स टिलरसन को लेटर लिखा था, जिसमें कहा गया था कि 1.29 खरब की ये डील US नेशनल सिक्युरिटी इंट्रेस्ट को बढ़ाएगी और साथ ही जॉब्स को भी सुरक्षित रखेगी।
इंडिया-यूएस बिजनेस संबंधों को प्रमोट कर रही इंडस्ट्री के ऑफिशियल ने कहा कि व्हाइट हाउस और कांग्रेस से मिले सपोर्ट से इस डील को काफी मजबूती मिली है। अब स्टेट डिपार्टमेंट से क्लियरेंस की जरूरत है। एक तरफ इंडिया जहां सर्विलांस के लिए अन आर्म्ड ड्रोन हासिल करने की कोशिस कर रहा है। वहीं, इंडियन मिलिट्री वास्तव में मिसाइल फायर करने वाले प्रीडेटर एवेंजर एयरक्राफ्ट हासिल करने की रिक्वेस्ट भेज चुकी है, जिसे ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन ने मंजूर नहीं किया था। स्टेट डिपार्टमेंट में इस बात को लेकर चिंता है कि अगर इंडिया को सर्विलांस ड्रोन मिल जाते हैं तो फिर वो आर्म्ड ड्रोन हासिल करने की अपनी कोशिश दोबारा करेगा।

भारतीय सेना तब से ही आर्म्ड ड्रोन्स हासिल करना चाहती है, जब से US ने इनका इस्तेमाल पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ किया था। US एक्सपोर्ट के मुताबिक, लॉ ऐसे किसी भी देश को इस तरह के हथियार (आर्म्ड ड्रोन्स) देने की मनाही है, जो अमेरिकी फौजों के साथ लड़ाई में हिस्सा ना लेती हों।
टाटा एडवांस्‍ड सिस्‍टम ने अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन के साथ सोमवार को एग्रीमेंट साइन किया। जिसके बाद अब भारत में एफ-16 फाइटर प्‍लेन बनाए जाएंगे। इस करार के साथ ही कंपनी ने टेक्‍सास के फोर्ट वर्थ प्‍लांट को शिफ्ट करने की दिशा में कदम उठा लिया है। यह घोषणा ऐसे समय पर की गई है, जब मोदी US के दौरे पर जा रहे हैं।

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