सुशासन बाबु के नाक के नीचे तबादले के नाम पर स्वास्थ्य विभाग में बजी नीरो की बंशी. बिहार के स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला किया गया है. आरडीडी, सिविल सर्जन, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी और दन्त चिकित्सक के कुल 14 ट्रांसफर स्वास्थ्य विभाग ने किये हैं. इस ट्रांसफर के नाम पर एक बार फिर से विभाग ने अपने चहेते पदाधिकारियों को उपकृत करने की साजिश में सफलता प्राप्त की है. फर्जीवाड़ा कर सिविल सर्जन बनकर मोतिहारी में दवा घोटाले के आरोपी को पुनः मोतिहारी का सिविल सर्जन बनाया गया तो दूसरी ओर कैंसर पीड़ित 70 वर्षीय बूढी माँ के बेटे को म्यूचल ट्रांसफर नहीं मिला.
स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से चल रहे ट्रांसफर के खेल को बदस्तूर जारी रखते हुए इस चुनावी मौसम में विभागीय मठाधीशों ने मोतिहारी दवा घोटाले के आरोपी सिविल सर्जन डॉ सरोज कुमारी सिंह को पुनः पूर्वी चंपारण का सिविल सर्जन बना दिया. विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार गया के नए सिविल सर्जन डॉ कमल किशोर राय होंगे. डॉ रूप नारायण कुमार अररिया के सिविल सर्जन बनाए गये जबकि समस्तीपुर के नए सिविल सर्जन सत्येंद्र कुमार गुप्ता होंगे. पटना की अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विभा कुमारी सिंह को पटना का नया सिविल सर्जन बनाया गया है. डॉ पशुपति प्रसाद सिंह गुरु गोविंद सिंह सदर अस्पताल पटना के नए अधीक्षक बनाए गये. पटना के सिविल सर्जन डॉ राज किशोर चौधरी को आरडीडी बनाया गया है.
ज्ञात है कि 2014-15 में मोतिहारी सिविल सर्जन के पद पर रहते हुए डॉ सरोज कुमारी सिंह ने फर्जी तरीके से बिना दवा की आपूर्ति किए ही 12 वाउचर बिल के माध्यम से 4 करोड़ 50 लाख 70 हजार 920 रुपये आपूर्तिकर्ता द्वारा निकासी करवाई थी. तत्कालीन जिलाधिकारी ने उप विकास आयुक्त व अपर समाहर्ता के नेतृत्व में टीम गठित कर मामले की जांच करायी तो स्टोर में मात्र 85 लाख 7 हजार 920 रुपये की दवाइयां पायी गयीं. अप्रैल 2017 में जिलाधिकारी के आदेश पर मोतिहारी नगर थाने में तत्कालीन आरोपी सिविल सर्जन डॉ सरोज कुमारी सिंह, भंडार चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. यूएस पाठक, प्रधान लिपिक भुवनेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव, लिपिक मनोज कुमार एवं अमित कुमार पर केस दर्ज हुआ. इसके बाद सिविल सर्जन फरार हो गयी थीं.
उसी क्रम में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी सिविल सर्जन डॉ सरोज कुमारी सिंह फर्जी तरीके से प्रोन्नति पाकर सिविल सर्जन बनी थीं. इसके बाद विभाग ने उनको डिमोशन कर अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी बना दिया और वर्तमान में वह सारण के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी के पद पर हैं. विभागीय खिलाडियों ने सुशासन बाबु के चहेते पदाधिकारी के विभागीय प्रमुख रहते पुनः उन्हें मोतिहारी का सिविल सर्जन बना दिया. इससे एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं.
विभागीय अधिसूचना संख्या 1051(2) दिनांक 22 सितम्बर 2020 द्वारा डॉ जावेद अनवर (पटना निवासी) को अधौरा कैमूर से पटना, डॉ सुमिता कुमारी (पटना निवासी) को किशनगंज से पटना, डॉ प्रभात भास्कर को करपी, अरवल से छतरपुर सुपौल, डॉ अनामिका सिन्हा को बेलदौर खगड़िया से सिधवलिया गोपालगंज तथा डॉ राम बालक सिंह को इमामगंज गया से जयनगर मधुबनी में स्थान्तरित किया गया है. जबकि एक 70 वर्षीय कैंसर पीड़ित शाहनाज बानो के पुत्र द्वारा 6 माह से म्यूचल ट्रांसफर की मांग को भी विभाग ने अनसुना कर दिया. यही नहीं स्वयं शाहनाज बानो ने अपने पुत्र डॉ मो शाहिद एकबाल के म्यूचल ट्रांसफर की मांग करते हुए 9 जुलाई 2020 को मुख्यमंत्री सचिवालय से गुहार लगाई थी. दंत चिकित्सक डॉ मो शाहिद एकबाल (दरभंगा निवासी) प्राo स्वाo केंद्र फुलवरिया गोपालगंज में कार्यरत हैं, जिन्होंने प्राo स्वाo केंद्र खजौली मधुबनी में कार्यरत डॉ विधुशेखर से म्यूचल ट्रांसफर का आवेदन विभाग को दे रखा था पर बिहार के स्वास्थ्य विभाग में गुहार लगाना नक्कारखाने में तूती की आवाज़ से ज्यादा अहमियत नहीं रखता.



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