लंबी प्रतीक्षा के बाद देश की सबसे हाईस्पीड ट्रेन 18 (Train 18) के संचालन को मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद जल्द ही ट्रेन पटरियों पर दौड़ने लगेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रेलवे मंत्रालय एक सप्ताह के भीतर अपनी महत्वपूर्ण ट्रेन 18 का संचालन शुरू कर देगा। ट्रेन के संचालन के लिए इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर जनरल (EIG) ने तीन दिन के कड़े परीक्षण के बाद औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। रेल मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक सप्ताह के भीतर ट्रेन-18 को हरी झंडी दिखाकर इसके संचालन की शुरुआत कर सकते हैं।
ट्रेन नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चलेगी। इसका किराया शताब्दी एक्सप्रेस से करीब 40-50 फीसदी अधिक है। इसी महीने रेलमंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ट्रेन-18 नई दिल्ली और वाराणसी के बीच चलेगी। यह ट्रेन 755 किलोमीटर की दूरी आठ घंटे में तय करेगी। यह ट्रेन केवल कानपुर और प्रयागराज रुकेगी। वर्तमान में सबसे तीव्रगामी ट्रेन को इस दूरी को तय करने में साढ़े ग्यारह घंटे का समय लगता है। इस ट्रेन के एग्जिक्यूटिव क्लास का किराया 2,800 रुपये से 2,900 रुपये के बीच और चेयर कार का किराया 1,600 रुपये से 1,700 रुपये के बीच निर्धारित किया गया है।
बता दें कि ट्रेन 18 का निर्माण चेन्नई स्थित इंटिग्रल कोच फैक्टरी (ICF) में किया गया है। इसका परिचालन परीक्षण रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (RDSO), लखनऊ की देखरेख में किया गया है। परीक्षण के दौरान ट्रेन का 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से परिचालन सफल रहा। यह ट्रेन अधिकतम 200 किलोमीटर की रफ्तार से चलने में सक्षम है। ट्रेन 18 में कुल 16 कोच हैं। इस ट्रेन को 18 महीने में तैयार किया गया है और इसके निर्माण पर 97 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। भविष्य में ये ट्रेन 30 साल पुरानी शताब्दी ट्रेनों की जगह लेगी।



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