दुनिया का सबसे बड़ा विमान बनाने का दावा करने वाली स्केल्ड कंपोजिट्स इंजीनियरिंग ने कैलिफोर्निया में इसका सफल परीक्षण किया.
इस विमान को “स्ट्रैटोलॉन्च” नाम दिया गया है. परीक्षण के दौरान 17 हजार फीट की ऊंचाई तक जाते हुए विमान ने करीब ढाई घंटे तक मोजावे रेगिस्तान के ऊपर लगभग 304.16 किमी. प्रति घंटा तक की रफ्तार पकड़ते हुए उड़ान भरी. कंपनी के अनुसार विमान का अभी यह परीक्षण मात्र था, इसकी क्षमताएं इससे भी कहीं अधिक हैं. विमान और भी ऊंचाई तक जा सकता है और गति भी अभी सीमित रखी गई. भविष्य में होने वाले परीक्षणों में इसके पूर्ण क्षमताओं को परखा जाएगा.
विमान के विशेषताओं की बात करें तो फुटबॉल के दो मैदान से भी ज्यादा इसके पंखों का (करीब 385 फीट) फैलाव है. इसमें छह बोइंग 747 इंजन लगे हैं, जिनकी मदद से यह तेजी से टेकऑफ करने और अधिक ऊंचाई तक जाने में सक्षम है. आपस में जुड़ी हुई डुअल बॉडी का एरोप्लेन है. इसका इस्तेमाल फिलहाल केवल साइंटिफिक प्रोजेक्टस के लिए किया जाएगा लेकिन आने वाले समय में कामर्शियली भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. इस विमान को पहली बार मई 2017 में देखा गया था, तब ग्राउंड टेस्ट के दौरान रनवे पर लगभग उसी स्पीड में इसे दौड़ाया गया था जितने में इसे टेकऑफ करना था.
स्ट्रैटोलॉन्च बनाने का मुख्य मकसद रॉकेट और उपग्रहों को अंतरिक्ष में उनकी कक्षा तक पहुंचाने में मदद करना है. उपग्रहों को रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में भजा जाता था जो काफी खर्चीला और काफी समय लगने वाला था. स्ट्रैटोलॉन्च की मदद से इसका खर्च काफी कम आएगा और यह समय भी बचाएगा. इसके जरिए सफर करना भी आसान व सुरक्षित होगा. सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए किसी साइट विशेष पर निर्भरता भी समाप्त होगी.
स्ट्रैटोलॉन्च एक बार में तीन सैटेलाइट ले जा सकता है, जो रॉकेट के साथ इसके विंग के बीच में अटैच की जाएंगी. 35 हजार फीट की ऊंचाई पर इन रॉकेट्स को शुरू किया जाएगा और वे अपनी कक्षा की ओर बढ़ जाएंगे. विमान करीब 5,89,676 किलोग्राम वजन अपने साथ लेकर उड़ने में सक्षम होगा. 2011 में शुरुआती तौर पर इसकी अनुमानित लागत 300 मिलियन डॉलर बताई गई थी. कार्बन फाइबर से बने विमान में दो कॉकपिट और 28 पहिए हैं. विमान की ऊंचाई पचास फीट और पंखों की लंबाई 385 फीट है. सवा दो लाख किलो वजनी इस विमान की ईंधन क्षमता 1.3 मिलियन पाउंड है.
माइक्रोसॉफ्ट के को- फाउंडर पॉल जी एलन ने स्केल्ड कंपोजिट्स इंजीनियरिंग कंपनी की स्‍थापना 2011 में की थी. पॉल ने इस विमान को बनाने का सपना देखा था और इसका डिजाइन तैयार किया था. परन्तु 2018 में एक जानलेवा बीमारी के चलते उनकी मौत हो गई. कंपनी के चीफ एग्जीक्यूटिव जीन फ्लॉयड ने कहा कि मेरे लिए काफी भावुक क्षण है, क्योंकि मैं तब भी पॉल का सपना पूरा होते देख रहा था. आज अपने सपने को आसमान में उड़ते देखने के लिए वह नहीं है.
हाँलाकि बोइंग भी इसी तर्ज पर एक कमर्शियल विमान का निर्माण कर रही है, जिसमें 235 फीट के फोल्डिंग विंग्स लगे होंगे. कंपनी का दावा है कि यह सबसे बड़ा दो इंजन वाला जेटलाइनर होग. कंपनी के अनुसार इसका परीखण 2020 में होगा. इससे पहले दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ‘हॉवर्ड हग्स’ नामक विमान प्रयोग में लाया जाता था, जिसमें आठ इंजन लगाए गए थे. वह विमान अब एक म्यूजियम में है. इसके विंग का फैलाव करीब 320 फीट था लेकिन यह सिर्फ 219 फीट लंबा ही था. एंटोनोव एएन 225 कॉर्गो प्लेन भी काफी बड़ा है, जिसमें छह इंजन हैं और इसके विंग का फैलाव करीब 275.5 फीट है.


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