नई शिक्षा नीति से देश के शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिलेगा : डॉक्टर संतोष

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वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य एवं नेशनल युवा कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड दिल्ली के प्रतिनिधि डॉक्टर शरद चंद्र संतोष ने मोदी सरकार की नई शिक्षा नीति का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार से इस नीति को मंजूरी मिलने के बाद देश के शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिलेगा.
डॉक्टर संतोष ने कहा कि इस नई शिक्षा नीति में सबसे ज्यादा स्वागत योग्य कदम यह है कि शिक्षा के लिए एक आयोग का गठन किया जाएगा. यह आयोग पूरे देश के शिक्षण संस्थानों पर नजर रखेगी. वहीं दूसरा सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया है कि किसी भी क्षेत्र में शोध करने वाले स्कॉलर को पैसों की कमी नहीं झेलनी पड़ेगी. इसके लिए पर्याप्त फंड की व्यवस्था की जाएगी. शिक्षा नीति में इस बदलाव से कई वर्षों से चले आ रहे हैं मैकाले पद्धति का अंत होगा और शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिलेगा. शिक्षा पाना सस्ता और सरल हो जाएगा. अब कोई भी शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा.
डॉक्टर संतोष ने कहा कि पूर्व की शिक्षा नीति में दूसरे देशों से जुड़े एवं भारत पर आक्रमण करने वालों की संस्कृति व नीति को भारतीय शिक्षा प्रणाली के तहत महिमा मंडित किया जा रहा था. इस नई शिक्षा नीति से समानता तो आएगी ही सभी को समान अवसर भी मिलेगा तथा युवाओं के स्किल में बढ़ोतरी होगी. नयी नीति में पर्यावरण, कला और खेल को प्राथमिकता दी गई है. किसी वजह से बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुके युवा एवं युवतियों को पुनः पढ़ने का मौका मिलेगा. इस नीति से कला और विज्ञान के बीच के दरार को भी पाटा गया है. सबके लिए आसान पहुंच, इक्विटी, गुणवत्ता, वहनीयता और जवाबदेही के आधारभूत सिद्दांतों वाली नयी शिक्षा नीति को वोकेशनल कोर्स, मातृभाषा, स्थानीय क्षेत्र और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए मंजूरी दी गई है. नयी नीति में भारत की भाषा और इससे जुड़े इतिहास की जानकारी कराने पर बल दिया गया है. इसमें शारीरिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है.
उन्होंने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय जो अब शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा. मंत्रालय एनसीईआरटी के माध्यम से आठ वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा विकसित करेगा. छठे वर्ग से ही व्यावसायिक शिक्षा शुरू हो जाएगी जिसमें इंटर्नशिप भी शामिल होगी. माध्यमिक स्तर पर ही कई विदेशी भाषाओं को वैकल्पिक रूप से चुना जा सकेगा. उच्चतर शिक्षा संस्थानों में साढ़े तीन करोड़ नई सीटें बढ़ेंगी. देश में वैश्विक मानकों के अनुरूप आईआईटी, आईआईएम के समकक्ष बहुविषयक शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे. स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए डिजिटल अवसंरचना, डिजिटल कंटेंट और क्षमता निर्माण पर काम होगा.
डॉक्टर संतोष ने कहा कि मई 2016 में पूर्व कैबिनेट सचिव स्वर्गीय एस. आर. सुब्रमण्यन की अध्यक्षता वाली गठित समिति तथा जून 2017 में, प्रख्यात वैज्ञानिक, पद्म विभूषण डॉ के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में गठित समिति ने 31 मई 2019 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा प्रस्तुत किया, जिसे एमएचआरडी की वेबसाइट और ‘माईगव इनोवेट’ पोर्टल पर अपलोड कर आम नागरिक सहित समस्त हितधारकों के 2 लाख से ज्यादा विचारों, सुझावों, टिप्पणियों को प्राप्त कर बनाई गयी नयी नीति देश के शिक्षा क्षेत्र में युगांतकारी बदलाव की वाहक बनेगी.



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