जमीन से जमीन पर 290 किमी तक लक्ष्य को भेदने वाले सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का DRDO ने सफल परीक्षण किया. इसका प्रोपल्शन सिस्टम, एयरफ्रेम, पॉवर सप्लाई सहित कई महत्वपूर्ण उपकरण स्वदेशी हैं. ओडिशा के बालासोर में किये गये इस परीक्षण में ब्रह्मोस ने सभी फ्लाइट पैरामीटर्स को पूरा करते हुए लक्ष्य पर सटीक प्रहार किया.
ब्रह्मोस कॉर्पोरेशन के महानिदेशक डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा ने इस परीक्षण को भारत की मेक इन इंडिया की क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक अहम उपलब्धि करार दिया. परीक्षण के बाद बताया गया कि अधिकतम स्वदेशी उपकरणों से लैस ब्रह्मोस मिसाइल के नए संस्करण को जमीन या समुद्र में मौजूद प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है. 490 किमी दूर के लक्ष्य को भेदने में सक्षम ब्रह्मोस ने 11 मार्च 2017 को पहला परीक्षण किया गया था.
ब्रह्मोस को भारत की DRDO और रूस के NPOM ने संयुक्त रूप से विकसित किया है. दुनिया में अपनी तरह की इकलौती क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस सुपरसॉनिक स्पीड से दागी जा सकती है. भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौ सेना की जरूरतों के हिसाब से ब्रह्मोस को अलग-अलग उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है.



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