प्रवासी मजदूरों की आवाजाही पर SC ने एक हफ्ते के अंदर केंद्र से जवाब मांगा

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कोरोना संकट में लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूरों की आवाजाही के एक मामले पर दायर जनहित याचिका की सुनवायी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दो राज्यों के बीच मजदूरों की आवाजही के मामले में कार्रवाई करने का आदेश देने के साथ ही एक हफ्ते के अंदर केंद्र से जवाब मांगा है कि क्या प्रवासी मजदूरों को उनके गांवों में जाने की अनुमति दी जा सकती है?
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि कैसे सत्यापित किया जाएगा कि प्रवासी मजदूरों की आवाजाही बंद हुई है. इस पर याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि कुछ राज्य सरकारों का कहना है कि वे लोगों को उनके मूल गांवों में वापस भेज देंगे, लेकिन गृह मंत्रालय की ओर से किसी भी आवाजाही की अनुमति नहीं है.
इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि गृह मंत्रालय ने मजदूरों को लेकर दिशानिर्देश जारी किए हैं. ज्ञात है कि बीते दिनों गृह मंत्रालय ने मजदूरों की आवाजाही के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम जारी किया था.
गृह सचिव अजय भल्ला ने इसमें तब कहा था कि लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए मजदूरों को कुछ शर्तों के साथ राज्य के भीतर उनके काम के स्थानों पर जाने की अनुमति दी जाएगी. हालांकि, तीन मई तक बढ़ाए गए लॉकडाउन के दौरान मजदूरों को किसी भी प्रकार के अंतर-राज्य आवाजाही की अनुमति नहीं होगी.



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