SC का फैसला ही देश का कानून, तीन तलाक पर नया कानून बनाने की आवश्यकता नहीं : केन्द्र

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कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक पर किसी नये कानून की जरूरत को खारिज करते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे पर संरचनात्मक एवं व्यवस्थित तरीके से विचार करेगी। वैसे घरेलू हिंसा से निपटने वाले कानून समेत मौजूदा कानून इसके लिए पर्याप्त हैं। उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में तीन तलाक प्रथा को असंवैधानिक करार दिया। प्रसाद ने कहा कि प्रथम दृष्टया इस फैसले को पढ़ने से स्पष्ट होता है कि (पांच सदस्यीय पीठ में) बहुमत ने इसे असंवैधानिक और अवैध बताया है।
वित्त मंत्री अरूण जेटली ने इस फैसले को उन लोगों के लिए बड़ी जीत करार दिया जिनका मानना है कि पर्सनल कानून प्रगतिशील होने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि फैसला अब देश का कानून है।
जेटली ने कहा कि इस्लामी दुनिया के कई हिस्सों में तीन तलाक की प्रथा को खारिज कर दिया गया है। केंद्र सभी राज्यों को एक परामर्श भेज कर उन्हें उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहेगा। गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि मंत्रालय राज्य सरकारों को उचित कार्रवाई करने और उच्चतम न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहेगी।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद अगर कोई पति एक बार में तीन बार तलाक बोलता है, तो उसे वैध नहीं माना जायेगा और पत्नी ऐसे व्यक्ति को पुलिस के समक्ष ले जाने और घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराने के लिये स्वतंत्र है। साथ ही इस प्रथा पर रोक के लिए दंड प्रावधान भी मौजूद हैं।


ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने उच्चतम न्यायालय के फैसले पर किसी तरह की टिप्पणी से इनकार करते हुए कहा कि बोर्ड मिल बैठकर आगे का कदम तय करेगा।
ऑल इंडिया मुस्लिम वूमेन पर्सनल लॉ बोर्ड और ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक को लेकर मंगलवार को उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये फैसले को इस्लाम और देश की मुस्लिम महिलाओं की जीत करार देते हुए कहा कि इससे तलाक के नाम पर मुसलमान औरतों के साथ होने वाली नाइंसाफी पर रोक लगने की उम्मीद है।
ऑल इंडिया मुस्लिम वूमेन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का फैसला मुस्लिम समाज के लिये ऐतिहासिक है। यह देश की मुस्लिम महिलाओं की जीत है, लेकिन उससे भी ज्यादा अहम यह है, कि यह इस्लाम की जीत है। उम्मीद है कि आने वाले वक्त में तीन तलाक को हमेशा के लिये खत्म कर दिया जाएगा।
इस्लाम में कहीं भी तीन तलाक की व्यवस्था नहीं है, यह सिर्फ कुछ तथाकथित धर्मगुरुओं की बनायी हुई अन्यायपूर्ण व्यवस्था थी, जिसने लाखों औरतों की जिंदगी बरबाद की है। शाइस्ता ने कहा कि इस फैसले से मुस्लिम औरतों को एक नई उम्मीद मिली है। उच्चतम न्यायालय ने शरीयत से छेड़छाड़ किये बगैर छह महीने के अंदर संसद में कानून बनाये जाने की बात कही है। मुझे विश्वास है कि यह कानून बिना किसी दबाव के बनेगा और मुस्लिम महिलाओं को खुशहाली का रास्ता देगा।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि अब देश में तीन तलाक के नाम पर मुस्लिम महिलाओं के साथ होने वाले अन्याय को रोका जा सकेगा। उन्होंने कहा कि हजरत मुहम्मद साहब के जमाने में भी तीन तलाक की व्यवस्था नहीं थी। हम चाहते हैं कि जिस प्रकार कानून बनाकर सती प्रथा को खत्म किया गया, वैसे ही तीन तलाक के खिलाफ भी सख्त कानून बने। मैं संसद से गुजारिश करता हूं कि वह इंसानियत से जुड़े इस मसले पर नैर्सिगक न्याय के तकाजे के अनुरूप कानून बनाए।

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