मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा 31 मई, 2019 को जारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे का स्वागत करते हुए आरटीई फोरम के राष्ट्रीय संयोजक अंबरीश राय ने कहा कि यह एक अच्छा कदम है कि नई शिक्षा नीति के मसौदे में पूर्व-प्राथमिक और माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा को शामिल करते हुए “शिक्षा का अधिकार अधिनियम” के विस्तार की सिफारिश की गयी है.
श्री राय ने कहा कि इस सिफारिश का मकसद पूरा करने के लिए इसे ईमानदारीपूर्वक लागू करना होगा. भारत मे करोड़ों बच्चों के मौलिक कानूनी अधिकार स्कूली शिक्षा के अलावा, प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा पर जोर दिये जाने का मसला भी अहम है. फोरम लंबे समय से शिक्षकों के नियमितीकरण व गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के साथ-साथ स्कूलों में पूर्णकालिक शिक्षकों की पर्याप्त संख्या में नियुक्ति एवं आधी-अधूरी तनख़्वाह पर रखे जाने वाले गैर प्रशिक्षित अतिथि और पैरा शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग करता रहा है. मसौदे में शिक्षा के लिए समग्र वित्तीय आवंटन को दोगुना करने, शिक्षक प्रबंधन और सहायता के विकेन्द्रीकृत तंत्र को मजबूत करने, स्कूल पोषण कार्यक्रम के विस्तार के तहत मिड-डे मील के अलावे स्कूल में नाश्ते के प्रावधान को शामिल करने जैसी सकारात्मक बातें भी शामिल हैं. नई शिक्षा नीति में मौजूदा 10+2 वाले शिक्षा ढांचे को बदलकर 5 + 3 + 3 + 4 करने का है.
अंबरीष राय ने मसौदे की कुछ कमियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्कूलों के विकल्प के चुनाव और प्रतियोगिता को बढ़ावा देने के लिए आरटीई मानदंडों में छूट और ढील देने की बात कही गई है, जो उचित प्रतीत नहीं होता. फोरम का मानना है कि निजी स्कूलों के लिए एक मजबूत नियामक ढांचा तैयार करना आवश्यक है. माता-पिता के निजी स्कूलों के वास्तविक (डी-फैक्टो) नियामक बनने की बजाए इस कार्य में राज्य की जिम्मेदारी और भूमिका सुनिश्चित होनी चाहिए. गुणवत्ता, सुरक्षा और इक्विटी मानदंडों का पालन न किया जाना चिंता का विषय है. इस संदर्भ में निजी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश एवं एक उचित और सख्त निगरानी तंत्र विकसित किए जाने की आवश्यकता है.
श्री राय ने कहा कि फोरम जल्द ही राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर विभिन्न राज्यों में नई शिक्षा नीति के इस मसौदे पर परामर्श और चर्चा कर 30 जून 2019 तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सौंपी जाने वाली अपनी सिफारिशों का विस्तृत मसौदा तैयार करेगा.


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