अयोध्या में रामजन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने नामंजूर करते हुए पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्णय लिया है. साथ ही शरीयत के खिलाफ बताते हुए मस्जिद के लिए पांच एकड़ भूमि अन्यत्र लेने से भी इन्कार किया है. हालांकि मुस्लिम पक्ष के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए पुनः कहा कि वह पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के निर्णय से सहमत नहीं है. स्पष्ट रूप से सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुस्लिम पक्ष बंटा हुआ नजर आ रहा है.
लखनऊ में रविवार को बोर्ड कार्यकारिणी की बैठक में निर्णय लिया गया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर वो पुनर्विचार याचिका दायर करेगा. इसके पूर्व मुस्लिम पक्ष लगातार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करने की बात दोहराता रहा है पर रामजन्मभूमि के पक्ष में फैसला जाते ही ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने यू-टर्न ले लिया है. बोर्ड धर्म-शास्त्र और शरीयत के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है, हाँलाकि पुनर्विचार याचिका के लिए कानूनी बिंदु वही चुने गये हैं, जिन पर लंबी जिरह हो चुकी है. बोर्ड कानूनी दांव-पेंच के सहारे मामले को कुछ दिन और लटकाने का प्रयास करेगा.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपनी बैठक में 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के 5 सदस्यीय पीठ के आए फैसले में से कुछ बिन्दुओं को छांटे हैं जिनके आधार पर पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी. वरिष्ठ अधिवक्ताओं, मौलानाओं एवं मुस्लिम नेताओं का एक तर्क यह है कि 22-23 दिसंबर 1949 की रात में बलपूर्वक रामचंद्र जी की मूर्ति रखा जाना अवैधानिक था तो उन मूर्तियों को देवता कैसे मान लिया गया? पांच एकड़ भूमि लेने से इन्कार करने के लिए बोर्ड ने शरीयत को आधार बनाते हुए कहा है कि इस्लामी शरीयत मस्जिद के बदले कुछ भी लेने की इजाजत नहीं देती है. संविधान के अनुच्छेद 142 का प्रयोग करते समय न्यायमूर्ति ने इस बात पर विचार नहीं किया कि वक्फ एक्ट 1995 की धारा 104-ए तथा 51(1) के अंतर्गत मस्जिद की जमीन के एक्सचेंज या ट्रांसफर को पूर्णतया बाधित किया गया है तो अनुच्छेद 142 के तहत मस्जिद की जमीन के बदले में दूसरी जमीन कैसे दी जा सकती है.
बोर्ड के सचिव और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने बैठक के बाद कहा कि मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर नहीं है. यह महसूस किया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में कई बिंदुओं पर न केवल विरोधाभास है, बल्कि प्रथमदृष्टया अनुचित प्रतीत होता है. बोर्ड के सचिव मौलाना उमरेन महफूज रहमानी ने कहा कि शरीयत के अनुसार हम मस्जिद के एवज में कोई वस्तु या जमीन नहीं ले सकते, लिहाजा हम अयोध्या में बाबरी मस्जिद के बदले पांच एकड़ जमीन स्वीकार नहीं कर सकते. बाबरी मुस्लिम एक्शन कमेटी के सह संयोजक कासिम रसूल इलियास ने कहा कि हम फैसले के 30 दिन के अंदर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर देंगे.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में पचास सदस्य हैं, इनमें 35 सदस्य शामिल हुए, इनके अतिरिक्त कुछ विशेष आमंत्रित लोग भी बैठक में शामिल हुए. बैठक नदवातुल उलमा में होनी थी, लेकिन प्रशासनिक अनुमति नहीं मिलने की वजह से तीन घंटे लम्बी बैठक डालीगंज स्थित मुमताज पीजी कॉलेज में हुई.


loading…

Loading…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *